नयी दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार की केवल 1 ही शेयर पर ज्यादातर निर्भरता के मद्देनजर टॉप अमेरिकी इक्विटी शेयर बेहतर ऑप्शन लगते हैं। मार्केट कैपिटल के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस के शेयर में 164 फीसदी की तेजी आई है। इसने 23 मार्च को निचले स्तर पर पहुंचने के बाद भारतीय शेयर बाजार की रिकवरी में काफी योगदान दिया है। सेंसेक्स की तेजी में 43 फीसदी योगदान अकेले रिलायंस ने दिया है। जबकि इस दौरान अमेरिका के मशहूर 5 शेयर, जिन्हें FAANG भी जाता है, अमेज़ॅन, ऐप्पल, गूगल (एल्फाबेट), फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट ने इसी दौरान अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज एसएंडपी 500 में 22 फीसदी योगदान दिया है।

200 अरब डॉलर हो गई मार्केट कैपिटल
एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी रिलायंस के मालिक हैं। इसकी डिजिटल और ई-कॉमर्स यूनिट्स में बड़े निवेशकों द्वारा पैसा लगाए जाने से इसकी मार्केट कैपिटल इस साल करीब दोगुनी हो गई है। रिलायंस की मार्केट कैप इस साल 200 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर गई है। जहां तक डिजिटल और रिटेल यूनिट्स में पैसा लगाने वाले निवेशकों का सवाल है तो इनमें फेसबुक, गूगल और सिलिकॉन वैली के कुछ अन्य दिग्गज शामिल हैं। रिलायंस का अब सेंसेक्स इंडेक्स पर 17% वेटेज है, जो एक साल पहले 10% था।
फंड्स के लिए समस्या
रिलायंस का बढ़ता वेटेज देश के एक्टिव रूप से प्रबंधित फंड्स के लिए एक समस्या बन गया है क्योंकि उनके सामने किसी एक स्टॉक को रखने की लिमिट है। इसका मतलब है कि मनी मैनेजर रिलायंस जैसे बढ़ते शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में और शामिल नहीं कर सकते। इससे बाजार में जोखिम बढ़ता है। इसी तरह अमेरिका के सबसे बड़े शेयर ऐप्पल का एसएंडपी 500 की ग्रोथ में करीब 11 फीसदी योगदान रहता है। इसी योगदान को वेटेज कहते हैं। इसके बाद इस लिस्ट में माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और फेसबुक का नंबर है।


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