नई दिल्ली, अप्रैल 27। मोदी सरकार के लिए एक बहुत अच्छी खबर आई है। दरअसल भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (आयकर और कॉर्पोरेट कर) या डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन (डीटीसी) 2021-22 में 14.09 लाख करोड़ रु के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। ये पिछले वित्त वर्ष 2020-21 की तुलना में 49.02 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है। ये कोविड-19 महामारी के बाद अर्थव्यवस्था के वापस उछलने का संकेत देता है।

कितना रहा ग्रॉस डीटीसी
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष जेबी महापात्र ने यह जानकारी दी। महापात्र ने एक सम्मेलन के अंत में कहा कि शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (आई-टी रिफंड को ध्यान में रखते हुए) 2018-19 में हासिल किए गए 11.37 लाख करोड़ रु से 2.5 लाख करोड़ रु अधिक रहा, जो 2021-22 तक किसी वित्त वर्ष में सबसे अधिक भी है। 2021-22 के लिए सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह या ग्रॉस डीटीसी ने पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 32.75% से अधिक की वृद्धि हासिल करते हुए, 16.34 लाख करोड़ रु के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू लिया।
टैक्स अधिकारियों को मिलती है मदद
महापात्र ने कहा कि इससे पता चलता है कि अर्थव्यवस्था वापस पटरी पर आ गई है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड कर संग्रह महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि एक नई एनुअल इंफॉर्मेशन सिस्टम जिसमें एक वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए सभी वित्तीय लेनदेन का विवरण होता है, कर अधिकारियों को संग्रह को बढ़ाने में मदद करता है।
अप्रत्यक्ष कर संग्रह को पछाड़ा
पहली बार, प्रत्यक्ष कर संग्रह ने अप्रत्यक्ष कर संग्रह को पछाड़ दिया, जिसमें कुल कर संग्रह का 52 प्रतिशत हिस्सा था। महापात्र ने कहा कि अगले कुछ सालों में इसे 60 फीसदी करने का लक्ष्य है और अगले 15 सालों में टैक्स-जीडीपी अनुपात को मौजूदा 12 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करना है। सीबीडीटी के अध्यक्ष ने कहा कि ई-फाइलिंग पोर्टल पर 2021-22 के लिए 7.14 करोड़ से अधिक आई-टी रिटर्न दाखिल किए गए, जबकि 2020-21 के लिए 6.97 करोड़ से अधिक दाखिल किए गए थे। 2021-22 के वित्तीय वर्ष में 31 मई, 2021 तक 2.24 लाख करोड़ रु की राशि का रिफंड जारी किया गया।


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