Reciprocal Tariff Impact: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत से इंपोर्टेड आइटम पर 26% पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariff) लगाने का ऐलान किया है. 25 मार्च को जारी ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक इस कदम से भारत की GDP पर 31 बिलियन डॉलर का असर पड़ सकता है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक यह आंकड़ा 2025 के अंत तक भारत की अनुमानित GDP 4.3 ट्रिलियन डॉलर का लगभग 0.72% है.
फार्मा सेक्टर की बल्ले-बल्ले
रेसिप्रोकल टैरिफ में फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट को छूट दी गई है, जिससे सन फार्मा, डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज और अरबिंदो फार्मा जैसी कंपनियों को राहत मिली है. ये कंपनियाँ अपने राजस्व का महत्वपूर्ण हिस्सा अमेरिकी बाजार से प्राप्त करती हैं, जिसमें सन फार्मा का 33%, डॉ रेड्डीज का 48.5% और अरबिंदो फार्मा का 48.3% शामिल है.
इन सेक्टर्स पर पड़ेगा टैरिफ का असर
FY2024 में अपने एक्सपोर्ट के 32% के लिए अमेरिका पर निर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर इन टैरिफ से प्रभावित होगा. हालांकि, ट्रम्प की ओर से चीनी इंपोर्ट पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के कारण Apple को भारत से फोन निर्यात जारी रखना अभी भी फायदेमंद लग सकता है.
FY2024 में भारत से अमेरिका को क्लोदिंग और अपैरल एक्सपोर्ट 9.6 बिलियन डॉलर का था, जो इस कैटेगरी के सभी एक्सपोर्ट का 28% था. नए टैरिफ चीन और वियतनाम के मुकाबले में भारतीय कपड़ों को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं, जिनकी बाजार हिस्सेदारी क्रमशः 21% और 19% है.
CNBC TV18 के मुताबिक भारत फोर्ज (Bharat Forge) जैसे ट्रक एक्सपोर्टर जो अपना लगभग 20% राजस्व अमेरिका से कमाते हैं, उनको टैरिफ में बढ़ोतरी के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. संवर्धन मदरसन (Samvardhana Motherson) और सुप्रजीत इंजीनियरिंग जैसे ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर को भी इसी तरह के प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है.
टैरिफ से इन कंपनियों को फायदा
स्टील, तांबा, बुलियन, ऊर्जा और कुछ खनिज जैसे प्रोडक्ट्स जो अमेरिका में उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें इन टैरिफ से छूट दी गई है. ग्लोबल कॉपर की कीमतों में हाल ही में आई गिरावट से भारतीय तार और केबल मैन्युफैक्चरर्स के साथ-साथ हिंडाल्को (Hindalco) और वेदांता (Vedanta) जैसे एल्यूमीनियम प्रोड्युसर को भी फायदा हो सकता है.

लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने वित्त वर्ष 24 में अपने राजस्व का 14% हिस्सा अमेरिका से प्राप्त किया. हालांकि बुलियन को टैरिफ से छूट दी गई है, लेकिन अमेरिकी मंदी की आशंकाओं ने सोने की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे गोल्ड लोन कंपनियों को फायदा हुआ है, लेकिन आभूषण निर्माताओं के लिए चुनौतियां खड़ी हो गई हैं.
आभूषण और हीरा एक्सपोर्ट
अमेरिका को एक्सपोर्ट किए जाने वाले कटे और पॉलिश किए गए हीरों (Diamond) पर टैरिफ तेजी से बढ़कर 26% हो जाएगा. वर्तमान में ये आइटम्स टैरिफ फ्री हैं.हालांकि, भारत से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले सभी रत्न और आभूषणों में इनकी हिस्सेदारी 57% है.
आईटी सेवा आउटलुक
आईटी सर्विसेस सेक्टर (IT Service Sector) को डायरेक्ट टैरिफ प्रभावों का सामना नहीं करना पड़ सकता है, लेकिन अगर अमेरिकी इकोनॉमी लड़खड़ाती है तो यह असुरक्षित बना रहेगा. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys) और विप्रो (Wipro) जैसी कंपनियों को ऐसी परिस्थितियों में अपने सबसे बड़े बाजार में अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ सकता है.
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