Recession in News: जेपी मॉर्गन ने कहा है कि अगर ट्रंप प्रशासन की ओर से हाल ही में टैरिफ लागू करने का ऐलान किया. अगर यह लगातार लागू रहे तो वैश्विक मंदी (Global Recession) की संभावना 60% तक बढ़ जाएगी. विभिन्न देशों के सामानों पर लगाए गए ये टैरिफ 2025 तक अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं दोनों पर काफी असर डाल सकते हैं. यह बात दिग्गज इनवेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन के चीफ इकोनॉमिस्ट ब्रूस कासमैन ने कस्टमर्स को लिखे एक नोट में कही.
टैरिफ के ऐलान से शेयर बाजार में हाहाकार
अमेरिकी टैरिफ के ऐलान के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल मच गई है. अमेरिकी शेयर बाजार में 2020 के बाद पहली बार इस तरह की बिकवाली देखने को मिली. 4 अप्रैल को नैस्डैक 6% तक टूट गया. स्मॉलकैप इंडेक्स रसल 2000 इंडेक्स भी फरवरी के रिकॉर्ड हाई से करीब 10% नीचे आ गया है. उधर राष्ट्रपति ट्रम्प ने एयर फ़ोर्स वन पर उल्लेख किया कि अगर ट्रेड पार्टनर्स कुछ असाधारण पेशकश करते हैं तो वे टैरिफ कम करने पर विचार कर सकते हैं.

ग्लोबल इकोनॉमी पर टैरिफ का असर
जेपी मॉर्गन के चीफ इकोनॉमिस्ट कासमैन ने इन टैरिफ को 1968 के बाद से अमेरिकी परिवारों और व्यवसायों पर सबसे बड़ी टैक्स बढ़ोतरी बताया. उन्होंने कहा कि अन्य देशों की ओर से बदला, अमेरिकी ट्रेड सेंटीमेंट में गिरावट और सप्लाई चेन में रुकावट के जरिए उनके असर तेज हो सकते हैं. यह स्थिति एक बड़ा व्यापक आर्थिक झटका है जो अभी तक मौजूदा अनुमान में नहीं शामिल किया गया है.
स्टॉक मार्केट के कई फर्म ने मंदी की आशंका जताई
वॉल स्ट्रीट की कई फर्मों ने इन टैरिफ के कारण संभावित अमेरिकी मंदी के बारे में चिंता जाहिर की है. जेपी मॉर्गन के इकोनॉमिस्ट्स सतर्क हैं, लेकिन अहम आर्थिक प्रभाव की संभावना को स्वीकार करते हैं. कासमैन ने ग्लोबल इकोनॉमी में मंदी की संभावना बढ़कर 60% तक होने की आशंका जताई है, जोकि पहली 40% था.
बाजार का रिएक्शन और आर्थिक अनुमान
इन चेतावनियों के बावजूद कासमैन ने कहा कि जेपी मॉर्गन अपने पूर्वानुमानों में तत्काल बदलाव नहीं कर रहा है. फर्म अनुमानों को बदलने से पहले यह देखना पसंद करती है कि प्रारंभिक कार्यान्वयन और बातचीत की प्रक्रिया कैसे सामने आती है. हालांकि, वे इस बात पर जोर देते हैं कि अगर ये पॉलिसी जारी रहती हैं, तो वे इस साल मंदी का कारण बन सकती हैं.
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