REC members removed from Suzlon Energy Board: कर्ज मुक्त होने के बाद अब सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड में कर्ज देने वाली कंपनियों के बोर्ड मेम्बर हटने शुरू हो गए हैं। सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है कि आरईसी लिमिटेड ने सुजलॉन के बोर्ड से अपने नामित अजय माथुर को वापस ले लिया। उम्मीद है कि इस खबर का आज शेयर के रेट पर असर पड़ेगा।
सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड ने बताया है कि अप्रैल 2022 में रुपये के टर्म लोन समझौते के अंतर्गत आरईसी के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम की तरफ से कंपनी को पैसे दिए गए थे। अब यह लोन पूरा चुका दिया गया है। ऐसे में आरईसी ने अजय माथुर को बोर्ड से हटा लिया है। आरईसी एक सरकारी कंपनी है, जो ऊर्जा से जुड़ी कंपनियों को लोन प्रदान करती है।

सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड ने बतया है कि अजय माथुर को हटाने का फैसला 21 सितंबर, 2023 से लागू हो गया है। माथुर आरईसी के क्रेडिट मूल्यांकन प्रभाग में इकाई मूल्यांकन और अन्य संबंधित कार्यों की देखभाल करते हैं। आरईसी और IREDA ने सुजलॉन को करीब 4000 करोड़ रुपये का लोन दिया था, जो अब पूरा पटा दिया गया है।
वहीं दो दिन पहले ही सुजलॉन एनर्जी को एक और बड़ा ऑर्डर भी मिला है। सुजलॉन एनर्जी बिजली उत्पादक ब्राइटनाइट से 29.4 मेगावाट की पवन ऊर्जा परियोजना स्थापित करने का ऑर्डर मिला। ब्राइटनाइट महाराष्ट्र में 100 मेगावाट की पवन-सौर परियोजना विकसित कर रही है। इसके तहत सुजलॉन ने को एस120 की 14 इकाइयां स्थापित करने का ऑर्डर दिया गया है।
महाराष्ट्र के उस्मानाबाद में 2.1 मेगावाट की रेटेड क्षमता वाली 140 मीटर पवन टरबाइन जनरेटर को स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के अप्रैल 2024 से शुरू होने की उम्मीद है।
सुजलॉन एनर्जी भारत की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी है। अगस्त 2023 तक, कंपनी के पास 1,815.1 मेगावाट के ऑर्डर थे, जो 2019 के बाद से अब तक के सबसे अधिक हैं।


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