बैंकिंग सिस्टम में नकदी की किल्लत दूर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आज से तीन दिनों की वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी शुरू कर रहा है। इस कदम से उन बैंकों को बड़ी राहत मिलेगी जो कर्ज की भारी डिमांड का सामना कर रहे हैं। बाजार के जानकार इस नीलामी पर पैनी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि दोपहर तक कई फाइनेंशियल शेयरों में तेजी आने की उम्मीद है।
बाजार में जब भी कैश की कमी होती है, कॉल मनी रेट्स में उछाल देखने को मिलता है। RBI की यह VRR नीलामी बैंकों के लिए उधारी की लागत कम करने में मददगार साबित होगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा सरकारी बैंकों (PSB) को मिलने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स का मानना है कि आज स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) जैसे शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है। उधारी सस्ती होने से बड़े लेंडर्स के मार्जिन में सुधार आता है।

| सेक्टर | रडार पर रहने वाले शेयर | मुख्य असर |
|---|---|---|
| सरकारी बैंक | स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक | NIM मार्जिन में सुधार |
| NBFCs | बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस | फंडिंग लागत में कमी |
| HFCs | LIC हाउसिंग, हुडको (HUDCO) | बेहतर स्प्रेड्स |
VRR के साथ सरकारी बैंकों और NBFCs में इंट्राडे सेटअप
मनी मार्केट के इन ऑपरेशंस से नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) को भी काफी राहत मिलती है। ये कंपनियां अपने रोजमर्रा के कामकाज के लिए शॉर्ट-टर्म कर्ज पर निर्भर रहती हैं। ब्याज दरें कम होने से हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFC) अपने पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाती हैं। ट्रेडर्स को आज शुरुआती प्राइस एक्शन और संभावित ब्रेकआउट पर नजर रखनी चाहिए। इंट्राडे प्लेयर्स के लिए कॉल ऑप्शंस में निवेश के अच्छे मौके बन सकते हैं।
हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व से मिलने वाले ग्लोबल संकेत बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। अगर ग्लोबल यील्ड में बढ़ोतरी होती है, तो RBI की इस राहत का असर कम हो सकता है। बॉन्ड मार्केट में उतार-चढ़ाव बैंकों की बढ़त को सीमित कर सकता है। इसलिए, निवेशकों को अपनी ट्रेडिंग कैपिटल सुरक्षित रखने के लिए आज स्टॉप-लॉस का सख्ती से पालन करना चाहिए।
भारतीय क्रेडिट मार्केट में स्थिरता बनाए रखने के लिए लिक्विडिटी का बैलेंस होना बेहद जरूरी है। इस नीलामी के नतीजे ही तय करेंगे कि आज निफ्टी बैंक (Nifty Bank) किस दिशा में बंद होगा। सिस्टम में दबाव के स्तर को समझने के लिए वेटेड एवरेज रेट को ट्रैक करना जरूरी है। अगर कट-ऑफ रेट कम रहता है, तो शेयरों में टिकाऊ तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में सरकारी बैंकों पर खास नजर रखें, क्योंकि वे इस रैली की अगुवाई कर सकते हैं।


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