RBI का नियम : RTGS व NEFT से पैसा ट्रांसफर में देरी पर मिलेगा हर्जाना

नई दिल्ली, अगस्त 29। बैंक से पैसे ट्रांसफर करने के तरीकों में आरटीजीएस और नेफ्ट दो सबसे प्रमुख विकल्प हैं। यहां तक नेट बैंकिग या फोन बैंकिंग सुविधा का उपयोग करके भी एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में पैसा ट्रांसफर करने का यह सबसे सुविधाजनक प्रक्रिया है। कस्टमर्स सामान्य तौर पर बैंक की शाखा पर जाकर या नेट बैंकिग के माध्यम से आरटीजीएस और नेफ्ट प्रोसेस का प्रयोग कर के पैसा ट्रांसफर करते हैं। हालांकि, यूपीआई के चलन में आ जाने से ज्यादातर लोग फोन पे, गूगल पे, पेटीएम जैसे ऐप्पलिकेशन की मदद से भुगतान करने लगे हैं, यूपीआई आईएमपीएस के तर्ज पर काम करता है। आईएमपीएस में आसानी से तुरंत पैसा एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर हो जाता है। ग्राहक नेट बैंकिंग और फोन बैंकिंग के माध्यम से भी आईएमपीएस प्रोसेस का लाभ उठाते हैं।

पैसे अटकने पर क्या है नियम

पैसे अटकने पर क्या है नियम

ऑनलाइन माध्यम से पैसा ट्रांसफर करने की एक सबसे बड़ी पेरशानी यह है कि कई बार पैसा अटक जाता है। पैसा खाते से कट जाने और दूसरे खाते में न पहूचने की कई वजहें हो सकती हैं। पैसा अटकने के बाद सवाल यह दिमाग में आता है कि, क्या आरबीआई ने इस संबंध में कोई नियम बनाया है। तो इस सवाल का जवाब है कि हा आरबीआई ने इस संबंध में नियम बनाया है। आरबीआई के गाइडलाइन के मुताबिक आरटीजीएस और नेफ्ट के माध्यम से फंड ट्रांसफर करने पर अगर ग्राहक का पैसा बिच में ही अटक जाता है तो तय समय सीमा के अंदर ट्रांजेक्शन का सेटलमेंट होना चाहिए। नियम के अनुसार अगर ऐसा नहीं होता है तो बैंक को ग्राहक को जुर्माना देना पड़ेगा।

नेफ्ट के माध्यम से पैसे ट्रांसफर कराने के क्या हैं नियम

नेफ्ट के माध्यम से पैसे ट्रांसफर कराने के क्या हैं नियम

नेफ्ट के माध्यम से पैसा ट्रांसफर करने के बाद नियम के मुताबिक अधिकतम 2 घंटे अंदर पैसा ट्रांसफर हो जाना चाहिए। नियम यह कहता है कि अगर किसी कारण से पैसा ट्रांसफर नहीं हो पाता है तो इसी दो घंटे के अंदर उसी अकाउंट में पैसा वापस आ जाना चाहिए। अब अगर ग्राहक का पैसा इन दो 2 घंटों में सेटलमेंट नहीं हो पाता है तो बैंक को इसके लिए ग्राहक को जुर्माना देना होगा।

क्या है आरटीजीएस के नियम

क्या है आरटीजीएस के नियम

आरटीजीएस के माध्यम से पैसा ट्रांसफर करने को लेकर आरबीआई के नियम अलग हैं. नियम के अनुसार पैसा रियल टाइम यानी की तुरंत ट्रांसफर हो जाना चाहिए। अगर आरटीजीएस ट्रांसफर में ऐसा नहीं होता है तो एक घंटे के अंदर पैसे का सेटलमेंट करना आवश्यक है। नियम के अनुसार पैसा या तो भेजे गए बैंक खाते में या फिर ग्राहक के खाते में एक घंटे के अंदर ट्रांसफर हो जाना चाहिए। पैसा अटकने की स्थिति में ग्राहक को जुर्माना देना पड़ेगा।

बैंको को कितना देना पड़ेगा जुर्माना

रिजर्व बैंक के मुताबिक आरटीजीएस और नेफ्ट के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करने पर अगर ग्राहक का पैसा अटक जाता है तो तय समय सीमा के भीतर के ट्रांजेक्शन का सेटलमेंट हो जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो बैंकों को ग्राहक को जुर्माना देना पड़ेगा। जुर्माने की राशि मौजूदा रेपो रेट पर निर्भर करता है। बैंको को 2 प्रतिशत ब्याज का भी भुगताना करना पड़ता है। इस समय रेपो दर 4.90 प्रतिशत है, जिसके साथ 2 प्रतिशत का ब्याज भी बैंक को देना पड़ेगा।

कहा करनी होगी शिकायत

कहा करनी होगी शिकायत

पैसे की समय सीमा के अंदर ट्रांसफर न होने की शिकायत ग्राहक बैंक जाकर, बैंक के हेल्पलाइन नंबर पर फोन करके या फिर अधिकरिक मेल आईडी पर मेल करके कर सकते हैं। शिकायत करते वक्त ग्राहक को ट्रांजेक्शन के विषय में पूरी जानकारी देनी होगी।

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