लंबे इंतजार के बाद आखिरकार आईडीबीआई बैंक के लिए बड़ी राहत की खबर है। जी हां तो अगर आपका खाता सरकारी से प्राइवेट हुए आईडीबीआई बैंक में है तो यह खबर आप जरूर पढ़ लें।
नई दिल्ली: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार आईडीबीआई बैंक के लिए बड़ी राहत की खबर है। जी हां तो अगर आपका खाता सरकारी से प्राइवेट हुए आईडीबीआई बैंक में है तो यह खबर आप जरूर पढ़ लें। बीते कल बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लगभग चार साल के अंतराल के बाद आईडीबीआई बैंक को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) फ्रेमवर्क से हटा दिया है।

मालूम होगा कि बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार आने के बाद आरबीआई ने फैसला किया है। बता दें कि वित्तीय स्थिति बिगड़ने की वजह से आरबीआई ने मई 2017 में आईडीबीआई बैंक को पीसीए फ्रेमवर्क में डाल दिया था। मार्च 2017 में बैंक का एनपीए 13 फीसदी से ज्यादा हो गया था। हाल ही में आईडीबीआई बैंक के प्रदर्शन की समीक्षा 18 फरवरी, 2021 को हुई बैठक में वित्तीय पर्यवेक्षण बोर्ड (बीएफएस) द्वारा की गई थी। आरबीआई ने कहा, यह नोट किया गया कि 31 दिसंबर, 2020 को समाप्त तिमाही के नतीजों के मुताबिक, बैंक ने रेग्युलेटरी कैपिटल, नेट एनपीए और लीवरेज रेश्यो पर पीसीए मापदंडों के उल्लंघन में नहीं किया है।
4 साल बाद पीसीए फ्रेमवर्क से बाहर आया बैंक
बैंक कारोबार करते हुए कई बार वित्तीय संकट में फंस जाते हैं। इनको संकट से उबारने को आरबीआई समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करता है और फ्रेमवर्क बनाता है। वहीं प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन इसी तरह का फ्रेमवर्क है, जो किसी बैंक की वित्तीय सेहत का पैमाना तय करता है। यह फ्रेमवर्क समय-समय पर हुए बदलावों के साथ दिसंबर, 2002 से चल रहा है। बैंक ने एक लिखित में कहा है कि वह निरंतर आधार पर मिनिमम रेग्युलेटरी कैपिटल, नेट एनपीए और लीवरेज रेश्यो के मानदंडों का अनुपालन करेगा। आरबीआई ने कहा, उपरोक्त सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, यह निर्णय लिया गया है कि आईडीबीआई बैंक लिमिटेड को कुछ शर्तों और निरंतर निगरानी के अधीन, पीसीए ढांचे से बाहर किया जाए।
तीसरी तिमाही में मुनाफे में आया बैंक
वित्त वर्ष 2020-21 की दिसंबर तिमाही में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के स्वामित्व वाली आईडीबीआई बैंक का नेट प्रॉफिट 378 करोड़ रुपए रहा। इंट्रेस्ट इनकम में अच्छी बढ़ोतरी से बैंक का मुनाफा बढ़ा। पिछले साल समान अवधि में बैंक को 5,763 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। नेट इंट्रेस्ट इनकम 18 फीसदी बढ़कर 1810 करोड़ रुपए रही, जो पिछले साल समान अवधि में 1532 करोड़ रुपए थी। जबकि तीसरी तिमाही में बैंक का ग्रॉस एनपीए रेश्यो 28.72 फीसदी से गिरकर 23.52 फीसदी हो गई।


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