RBI New Guidelines: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लोन लेने वालों के लिए एक जरूरी बदलाव पर विचार कर रहा है. यह लोगों और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSE) के लिए फ्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर फीस हटाने की योजना बना रहा है. इसमें कारोबारी जरूरतों के लिए लोन भी शामिल हैं. मौजूदा समय में ये चार्ज रिटेल बॉरोअर्स के लिए 4-5% तक हो सकते हैं, जो अपने लोन को जल्दी चुकाते हैं या बंद करते हैं.
क्या है RBI का नया प्लान?
RBI के ड्राफ्ट सर्कुलर में कहा गया है कि टियर-1 और टियर-2 सहकारी बैंकों और शुरुआती चरण की NBFC को छोड़कर रेगुलेटेड एंटीटीज को कारोबारी जरूरतों के लिए व्यक्तियों और MSE की ओर से लिए गए फ्लोटिंग रेट लोन के शुरुआती पेमेंट पर कोई पेनाल्टी नहीं लगाना चाहिए. हालांकि, यह एमएसई बॉरोअर पर केवल 7.50 करोड़ रुपए की कुल स्वीकृत सीमा तक ही लागू होगा.
प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर पेनाल्टी और कस्टमर्स की शिकायतें
RBI के पर्यवेक्षी समीक्षा से पता चला है कि रेगुलेटेड एंटीटीज के बीच फौजदारी चार्ज के संबंध में प्रथाएं अलग-अलग हैं. इसके कारण ग्राहकों की शिकायतें और विवाद पैदा हुए हैं. कुछ लेंडर्स ने लोन समझौतों में प्रतिबंधात्मक खंड भी शामिल किए हैं ताकि उनको बेहतर ब्याज दरों या सेवा शर्तों के लिए लेंडर्स को बदलने से रोका जा सके.

कंसल्टेशन पेपर में यह भी सलाह दी गई है कि रेगुलेटेड एंटीटीज को न्यूनतम लॉक-इन पीरियड तय किए बिना लोन फौजदारी या प्री-पेमेंट की अनुमति देनी चाहिए. इसके अलावा अगर रेगुलेटेड एंटीटीज की ओर से ही फौजदारी या पूर्व भुगतान शुरू किया जाता है, तो कोई शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए.
स्टेकहोल्डर्स से प्रतिक्रिया मांगी गई
आरबीआई ने इस मसौदा प्रस्ताव पर 21 मार्च, 2025 तक हितधारकों से सुझाव आमंत्रित की हैं. इसका मकसद कर्ज समझौतों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है. ताकि फौजदारी या प्री-पेमेंट के समय किसी भी बिना पहले से तय पेनाल्ट की वसूली को रोका जा सके.
आरबीआई के इस कदम से कर्जदारों को काफी फायदा हो सकता है, क्योंकि इससे समय से पहले कर्ज चुकाने की लागत कम हो जाएगी. इसका मकसद लेंडर्स के बीच कंपीटिशन को बढ़ाना भी है, जिससे बॉरोअर को बिना किसी जुर्माने के बेहतर शर्तों के लिए कर्जदाता बदलने की ज्यादा आजादी मिलेगी.


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