RBI MPC Impact On FD: साल 2024 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की यह पहली मॉनटरी पॉलीसी कमेटी की बैठक है। इस दौरान लोगों को आरबीआई से काफी बड़ी घोषणाओं की उम्मीद थी। हालांकि आम पब्लिक का ध्यान रेपो रेट पर भी टिका हुआ था। खास तौर पर जिन लोगों की फिक्स डिपॉजिट स्कीम है और जिन लोगों को लोन लेना है या जिसे लोन लेना है, उनकी निगाह रेपो रेट पर टिकी हुई थी।
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि ये रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की फाइनेंशियल ईयर 2024 की लास्ट मीटिंग थी और इस दौरान रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि रेपो रेट में बदलाव न किए जाने से फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम की ब्याज दरें बढ़ाने का चांस तो बिल्कुल भी नहीं है लेकिन आने वाले दिनों में इनमें गिरावट देखने को जरूर मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के इस फैसले का असर कुछ ही दिन में देखने को मिल जाएगा।
हालांकि यह खबर लोने लेने वालों के लिए सही है, क्योंकि अगर रेपो में बदलाव नहीं हुआ है, तो जाहिर तौर पर बैंक की लोन पर ब्याज भी समान ही रहेंगी।
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि फिल हाल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा रेपो रेट को 6.50 फीसदी ही रखा गया है। इसके अलावा बैंक के अनुसार देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP करीब की ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत तक बनी रहने का अनुमान लगाया गया है।
आपको बताते चलें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा पिछले 1 साल से रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। आज से ठीक एक साल पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 8 फरवरी को हुई मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के दौरान रेपो रेट में बदलाव किया था और उसके बाद से अब तक रेपो रेट समान ही रही हैं और सेंट्रल बैंक द्वारा इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
पिछले साल रेपो रेट में बैंक के 0.25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इसके बाद रेपो रेट 6.25 फीसदी से बढ़कर 6.50 फीसदी हो गई थी।
हालंकी रेपो रेट में कोई बदलाव न होने से एफडी की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की गुंजाइश खत्म हो गई है, लेकिन इससे ज्यादा नुकसान भी नहीं होगा। क्योंकि विशेषज्ञों के अनुसार अगर इस बार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा रेपो रेट में कटौती की जाती तो फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम पर लगने वाली ब्याज दर में कटौती की जा सकती थी। लेकिन अब इंटरेस्ट रेट में कमी तौर आएगी लेकिन ज्यादा बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। लेकिन इस बार रेपो रेट सेम रहने के कारण फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम में पर मिलने वाली ब्याज दरों में कटौती देखने को मिल सकती है और आगे की ब्याज दर मौजूदा ब्याज दर से कम हो सकती है।
रेपो रेट में बदलाव न हो ने का कारण महंगाई दर में कमी आना भी है। गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा यह वित्त वर्ष खत्म होते होते मंहगाई दर 4 प्रतिशत तक आ सकती है। आरबीआई के अनुमान के मुताबिक मंहगाई पूरी तरह से कंट्रोल में है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि महंगाई दर समान रही है, इसी वजह से रिजर्व बैंक को रेपो रेट बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ी है।


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