नई दिल्ली, जून 9। मोदी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 2016 में नोटबंदी को लागू किया था। उस वक्त सरकार ने देश में चल रहे 500 और 1000 रुपये के नोट को बंद कर दिया था। इसके बाद उनकी जगह पर 500 रुपये का नया नोट और पहली बार 2000 रुपये का नोट जारी किया गया था। सरकार ने कहा था कि उसका नोटबंदी का कदम बेइमानों को तबाह कर देगा। ऐसा हुआ या नहीं यह तो अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन हाल ही में रिवर्ज बैंक के एक आदेश से जरूर पता चला है कि मोदी सरकार नोटबंदी के दौरान बेइमानी करने वालों को पकड़ने के लिए अभी भी प्रयासरत है। आइये जानते हैं कि आरबीआई ने ऐसा क्या किया है।
ये है आरबीआई का आदेश
आरबीआई ने देश के बैंकों को आदेश दिया है कि वे नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी के समय के सीसीटीवी फुटेज को संभाल कर रखें। आरबीआई के अनुसार जांच एजेंसियां नोटबंदी के दौर के कई मामलों की जांच कर रही हैं। इनमें से कई मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं। ऐसे में सीसीटीवी फुटेज बड़े काम के हैं। इससे अवैध गतिविधियों में शामिल रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
ज्यादातर बंद हो चुके नोट वापस आए
नोटबंदी के दौरान 15.41 लाख करोड़ रुपये के 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट प्रचलन में थे। इसमें से 15.31 लाख करोड़ रुपये के नोट वापस आ चुके हैं।
नोट की अदला बदली में बेइमानी के आरोप
ऐसे आरोप सामने आए हैं कि लोगों ने बैंकों से धांधली करके अपने ढेर सारे 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट नई करेंसी से बदल लिए थे। यह काम बेइमानी से किया गया है। इसी के चलते सरकार ढेर सारे लोगों को और कारोबारियों के खिलाफ जांच कर रही है। इसी जांच में सीसीटीवी अहम सबूत के तौर पर पेश किए जा सकते हैं। अगर यह आरोप साबित हो गए तो सरकार न सिर्फ बेइमानों को पकड़ने में कामयाब हो जाएगी, बल्कि हजारों करोड़ रुपये टैक्स और पेनाल्टी के रूप में भी मिलेगा।


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