RBI MPC Policy: नीतिगत दरों पर हर दो महीने में होने वाली रिजर्व बैंक की मीटिंग शुक्रवार 6 दिसंबर को खत्म हो गई है. गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता MPC ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. यह 11वां मौका है जब दरों में कटौती नहीं किया गया है. इस लिहाज से रेपो रेट 6.5 फीसदी पर बरकरार है. दरों को स्थिर रखने के पक्ष में 6 में से 4 सदस्यों ने वोट किया. कमिटी ने पॉलिसी रुख को न्यूट्रल बनाए रखा है.
महंगाई ने बढ़ाई टेंशन!
रिजर्व बैंक का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब रिटेल महंगाई दर उसके रेंज (2-6%) से बाहर है, जोकि अक्टूबर में 6.21 फीसदी पर रही. शक्तिकांत दास ने कहा कि रिजर्व बैंक ग्रोथ और महंगाई में तालमेल बनाकर चलेगा. गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि बढ़ती महंगाई का आर्थिक ग्रोथ पर बुरा असर पड़ा है. प्रोटेक्शनिज्म की वजह से ग्लोबल इंफ्लेशन में बढ़ोतरी की संभावना है. अमेरिकी डॉलर में मजबूती से फाइनेंशियल मार्केट में उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है.
रिजर्व बैंक की नीतिगत दरें
- रेपो रेट - 6.50%
- SDF - 6.25%
- MSF - 6.75%
- Bank rate - 6.75%
RBI क्यों घटता या बढ़ता है रेपो रेट?
बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन के चलते दुनियाभर के सेंट्रल बैंक ने महंगाई पर काबू पाने के लिए दरों में इजाफा किया. इसमें भारत का केंद्रीय बैंक यानी RBI भी शामिल है. सेंट्रल बैंक के पास रेपो रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक मजबूत हथियार है. ऐसे में जब भी महंगाई काबू से बाहर निकल जाती है या फिर निकलने लगती है तब RBI रेपो रेट में बदलाव करता है.

इससे अर्थव्यस्था में लिक्विडिटी फ्लो को कम करने की कोशिश की जाती है. यानी रेपो रेट हाई होगा तो बैंकों को RBI से मिलने वाला लोन महंगा मिलेगा. इसके चलते बैंक ग्राहकों को ज्यादा ब्याज दरों पर लोन बांटेंगे. नतीजनत, इकोनॉमी में लिक्विटी का फ्लो गिर जाएगा. और जब मनी फ्लो गिरेगा तो महंगाई घट जाएगी.
इसके ठीक उलट जब इकोनॉमी में लिक्विडिटी का फ्लो बढ़ाना होता है तब रिजर्व बैंक रेपो रेट को कम कर देती है. रेपो रेट कम होने से बैंकों को कम ब्याज पर RBI से लोन मिलता है. इससे ग्राहकों को भी लोन ब्याज दरों पर सस्ते में मिलता है. नतीजनत, इकोनॉमी की रफ्तार को जोश मिलता है. इसे उदाहरण से समझते हैं. कोरोना महामारी के समय आर्थिक संकट में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट घटाकर आर्थिक ग्रोथ में जोश भरने का काम किया.
रिवर्स रेपो रेट में बदलाव से कितना पड़ता है असर?
MPC पॉलिसी में रेपो रेट के साथ रिवर्स रेपो रेट का भी ऐलान किया जाता है. रिवर्स रेपो रेट उसे कहते है जिस रेट पर रिजर्व बैंक बैंकों को पैसा रखने पर ब्याज देता है. रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी कर RBI बाजार में नकदी को कम करता है. वहीं, बैंक RBI के पास अपनी होल्डिंग के लिए ब्याज लेकर इसका फायदा उठाते हैं. सेंट्रल बैंक इकोनॉमी में महंगाई बढ़ने के दौरान रिवर्स रेपो रेट बढ़ाता है, जिससे बैंकों के पास ग्राहकों को लोन देने के लिए फंड कम हो जाता है.
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