भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अहम पॉलिसी मीटिंग आज से शुरू हो रही है। तीन दिनों तक चलने वाली यह बैठक 8 अप्रैल को खत्म होगी। बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रेपो रेट 5.25 फीसदी पर ही बरकरार रहेगा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक तनाव फिलहाल इन वित्तीय फैसलों पर बड़ा असर डाल रहे हैं।
पश्चिम एशिया में जारी संकट की वजह से ग्लोबल एनर्जी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इस ट्रेंड की वजह से भारतीय रुपये और महंगाई पर भारी दबाव है। गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली छह सदस्यीय कमेटी इन तमाम जोखिमों की समीक्षा करेगी। कमेटी का फैसला देश में होम लोन की दरों और आर्थिक विकास की रफ्तार को प्रभावित करेगा।

RBI MPC बैठक: रेपो रेट और आपके घर के बजट पर क्या होगा असर?
कर्ज लेने वाले लोग उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी मंथली ईएमआई (EMI) में कोई बदलाव न हो। अगर दरें स्थिर रहती हैं, तो करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अपना बजट मैनेज करना आसान होगा। दूसरी ओर, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले लोग महंगाई से निपटने के लिए बेहतर रिटर्न की उम्मीद लगाए बैठे हैं। रेपो रेट में किसी भी बदलाव का सीधा और तुरंत असर बैंकों की ब्याज दरों पर पड़ेगा।
बुधवार को होने वाले ऐलान से पहले शेयर और बॉन्ड मार्केट में घबराहट का माहौल है। ग्लोबल करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक रुपये की चाल पर पैनी नजर रखे हुए हैं। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों पर ब्याज दरों के संकेतों का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलता है। जानकारों का मानना है कि लिक्विडिटी को लेकर केंद्रीय बैंक इस बार सतर्क रुख अपना सकता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स इस बात पर गौर कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक नए आंकड़ों को कैसे हैंडल करता है। कमेटी को एक साथ कई वैश्विक और घरेलू मोर्चों पर तालमेल बिठाना होगा। नीचे दी गई टेबल उन मुख्य वजहों को दर्शाती है, जो इस हफ्ते की पॉलिसी चर्चा को प्रभावित कर रही हैं।
| आर्थिक कारक | मौजूदा स्थिति | बाजार पर असर |
|---|---|---|
| रेपो रेट | 5.25 फीसदी | लोन EMI में स्थिरता |
| कच्चा तेल | बढ़ती कीमतें | महंगाई का दबाव |
| रुपये की वैल्यू | भारी उतार-चढ़ाव | आयात खर्च बढ़ने का जोखिम |
अब हर किसी को बुधवार सुबह आने वाले आधिकारिक फैसले का इंतजार है। यह फैसला अगली पूरी तिमाही के लिए देश का आर्थिक मिजाज तय करेगा। इसमें एक तरफ विकास की रफ्तार बनाए रखने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने की चुनौती। वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में आरबीआई के अगले कदम पर पूरे देश की नजर है।


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