RBI MPC Meeting Highlights: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज खत्म हो गई है। इस साल यानी वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की पहली समीक्षा बैठक है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक में हुई बातचीत और अहम फैसलों के बारे में जानकारी साझा की।
आरबीआई ने पहले के मुताबिक इस बार फिर भी रेपो रेट में कटौती की है। इस बार ये बैठक कुछ ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ बढ़ोतरी के ऐलान के बाद वैश्विक व्यापार में तनाव बना हुआ है, जिस वजह से वैश्विक मंदी के बादल छाए हुए हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारतीय आयात पर 26% टैरिफ लगाया है। इस कदम से वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर पर असर पड़ने की उम्मीद है, जिससे संभावित रूप से इसमें 20-40 आधार अंकों की कमी आ सकती है। विकास दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पहले के 6.25% से घटकर लगभग 6% हुई।
आरबीआई की फरवरी में हुई बैठक में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई थी, जिससे यह घटकर 6.25% हो गई थी। हालांकि, संजय मल्होत्रा ने कहा आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25% की कटौती की जो अब घटकर 6% हो गई है। इस ऐलान के बाद से आम आदमी की जेब पर असर पड़ सकता है। उनकी घरों और गाड़ियों की ईएमआई सस्ती हो सकती है।
आरबीआई अप्रैल मौद्रिक नीति MPC के 10 अहम पॉइंट्स
संजय मल्होत्रा ने कहा आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25% की कटौती की जो अब घटकर 6% हो गई है। वहीं, उन्होंने बताया भारतीय Q1 वित्त वर्ष 26 के रिटेल महंगाई अनुमान 4.5% से घटाकर 3.6% कर दिया है। वित्त वर्ष 26 रियल जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.7% से घटाकर 6.5% कर दिया है। MSF रेट 6.50% से घटाकर 6.25% किया गया है।
SDF रेट 6% से घटाकर 5.75% किया। 4% महंगाई दर का टारगेट हासिल करने के भरोसा है। MPC ने पॉलिसी के रुख में बदलाव किया है। US टैरिफ की वजह से करेंसी पर असर संभव, वहीं गोल्ड लोन पर आरबीआई पूरी जानकारी साझा करेगा। सुस्त ग्लोबल ग्रोथ से ऑयल कमोडिटी पर असर। US टैरिफ से महंगाई को लेकर चिंता नहीं।
लोन पर रेपो रेट (Repo Rate) का असर
बैंक लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए रेपो रेट जानना काफी जरूरी हो सकता है। रेपो रेट में कमी आने से ईएमआई कम हो जाती है। वहीं, अगर इसमें वृद्धि होती है तो इसकी ईएमआई में भी इजाफा होता दिखता है। यह वह ब्याज दर है जिस पर केंद्रीय बैंक कमर्शियल बैंकों को तब उधार देता है जब उन्हें फंड की कमी का सामना करना पड़ता है। यह तरीका उधार लेने की लागत को प्रभावित करके महंगाई को नियंत्रित करने में सहायता उपलब्ध करता है।
इतने साल बाद हुआ था दरों में बदलाव
वित्त वर्ष 26 के लिए पहली मौद्रिक नीति समिति (MPC) मीटिंग की बैठक हुई। हालांकि, पिछले फाइनेंशियल ईयर वित्त वर्ष 25 के लिए ये बैठक फरवरी 2025 में हुई थी। इस मीटिंग में RBI की मौद्रिक समीक्षा कमिटी ने 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की घोषणा की गई थी। यह 5 साल बाद ब्याज दरों में कटौती थी। इसके तहत MPC ने दरों को 0.25% घटाकर 6.25% कर दी गई थी।
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