RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक के नतीजे चंद मिनटों में आने वाली है. दरों में कोई भी बदलाव सीधे तौर पर लोन EMI पर असर डालेगा. 6 सदस्यों वाली मौद्रिक समीक्षा कमिटी यानी MPC ने अगर रेपो रेट में कमी की तो इसका मतलब है EMI कम होना, जबकि बढ़ोतरी से EMI बढ़ सकती है.
ब्याज दरों में कटौती का अनुमान
गुडरिटर्न्स में शामिल 33 में से 29 इकोनॉमिस्ट्स ने ब्याज दरों में कटौती का अनुमान दिया है. इसके तहत इस बार 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की जाएगी, जिससे कर्जदारों को राहत मिलेगी. बता दें कि यह नए फाइनेंशियल ईयर यानी FY26 के लिए पहली मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक है.
इन ट्रिगर्स से दरों में कटौती संभव
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और LPG सिलेंडर की बढ़ती कीमतों जैसे वैश्विक आर्थिक तनावों के बीच, रेपो दर में एक और कटौती की उम्मीद है. केंद्रीय बैंक ये बैठकें हर दो महीने में होती. इसमें वर्तमान बैठक 7 अप्रैल से शुरू हुई है, जोकि आज 9 अप्रैल को खत्म हो जाएघी.
लोन पर रेपो रेट का असर
रेपो रेट बैंक लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए काफी अहम है. इसमें कमी से लोन की ईएमआई कम हो जाती है, जबकि इसमें बढ़ोतरी से यह बढ़ जाती है. यह वह ब्याज दर है जिस पर केंद्रीय बैंक कमर्शियल बैंकों को तब उधार देता है जब उन्हें फंड की कमी का सामना करना पड़ता है. यह टूल उधार लेने की लागत को प्रभावित करके महंगाई को नियंत्रित करने में मदद करता है.

बैंक ऑफ अमेरिका ग्लोबल रिसर्च का सुझाव है कि भारतीय रिजर्व बैंक भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए रेपो दर में फिर से कटौती कर सकता है. उनका अनुमान है कि इसमें 0.25% की कटौती होगी, जो लगातार दूसरी कटौती होगी.
5 साल बाद फरवरी में दरें घटी थी
इसी साल फरवरी में हुई MPC मीटिंग में ब्याज दरों को घटाया गया था, जोकि 5 साल में पहली बार ऐसा हुआ था. इसके तहत आरबीआई ने एमपीसी की बैठक के दौरान रेपो दर में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की. इससे यह पिछले लेवल से 6.25% पर आ गई. इससे पहले मई 2020 में रेपो रेट में कटौती का ऐलान किया गया था, जिसके बाद फरवरी 2023 तक लगातार बढ़ोतरी के साथ 6.5% तक पहुंच गई थी.


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