RBI MPC Meeting 2024: ब्याज दरें 9वीं बार 6.5% पर स्थिर, महंगाई और आर्थिक ग्रोथ पर रिजर्व बैंक ने कही ये बात

RBI MPC Meeting 2024 Highlights: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त पॉलिसी में रेपो रेट को स्थिर रखा है, जोकि 6.5% है. RBI ने अगस्त में लगातार 9वीं बार दरों को स्थिर रखा है. रेपो रेट की दरें 2018 के बाद से अब तक सबसे ज्यादा है. गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक समीक्षा कमिटी यानी MPC मीटिंग में शामिल 6 सदस्यों ने दरों स्थिर रखने पर फैसला लिया गया है.

शक्तिकांत दास ने बताया कि MPC के 6 में से 4 सदस्यों ने दरों में बदलाव न करने के पक्ष में वोट किया. इसीलिए सेंट्रल बैंक की MPC अकोमोडेटिव रुख वापस लेने के पक्ष में रहा. बता दें कि रिजर्व बैंक ने पिछली बार 2023 में फरवरी पॉलिसी के दौरान दरों में बढ़ोतरी की थी. इस साल अप्रैल में हुई RBI MPC मीटिंग में ब्याज दरों को जस का तस रखा गया था.

रिजर्व बैंक की नीतिगत दरें

रेपो रेट 6.50%
SDF 6.25%
MSF 6.75%
Bank rate 6.75%

RBI MPC Meeting

आर्थिक ग्रोथ पर RBI का आउटलुक

रिजर्व बैंक ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर यानी FY25 के लिए रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 7.2% पर बरकरार रखा है. Q1FY25 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान बदलकर 7.1% कर दिया है, जोकि पहले 7.3% था. Q2 के लिए आर्थिक ग्रोथ रेट को भी 7.2% पर बरकरार रखा है. तीसरी तिमाही के लिए GDP ग्रोथ रेट 7.3% पर बरकरार रखा. वहीं, Q4FY25 के लिए GDP ग्रोथ का लक्ष्य 7.2% पर बरकरार रखा है.

रिजर्व बैंक क्यों घटाता या बढ़ाता है ब्याज दरें

दुनियाभर के सेंट्रल बैंक ने खासकर महंगाई पर लगाम कसने के लिए दरों में इजाफा किया. इसमें भारत का सेंट्रल बैंक यानी RBI भी शामिल है. क्योंकि सेंट्रल बैंकों के पास महंगाई से लड़ने के लिए रेपो रेट एक मजबूत हथियार होता है. ऐसे में जब भी महंगाई काबू से बाहर निकल जाती है या फिर निकलने लगती है तब रिजर्व बैंक रेपो रेट में बदलाव कर देता है. इसके जरिए RBI इकोनॉमी में लिक्विडिटी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है.

लिक्विडिटी फ्लो बढ़ना यानी रेपो रेट बढ़ेगा. इसका मतलब है कि बैंकों को RBI से मिलने वाला लोन महंगा मिलेगा. नतीजतन, बैंक ग्राहकों को महंगे ब्याज दरों पर लोन देंगे. इससे इकोनॉमी में लिक्विडिटी का फ्लो कम जाएगा. ऐसे में जब मनी का फ्लो गिरेगा तो महंगाई घट जाएगी. इसके ठीक उलट जब इकोनॉमी में लिक्विडिटी का फ्लो बढ़ाना होता है तब रिजर्व बैंक रेपो रेट को कम कर देती है, जिससे बैंकों को कम ब्याज दर पर RBI से लोन मिलता है. इससे कस्टमर्स को भी लोन सस्ते ब्याज दरों पर मिलेगा.

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