RBI की मौद्रिक नीति समिति (RBI Monetary Policy Committee) की फाइनेंशियल ईयर 2024-25 की बैठक में रिजर्व बैंक के गवर्नर शांतिकास दास के द्वारा इस बात का ऐलान गया कि रेपो रेट को 6.5 % पर रखा गया है।
आरबीआई ने इस बार 8वीं बार रेपो रेट को 6.5% पर बनाए रखने का फैसला किया है। आपको बता दें कि इस मीटिंग के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मजबूत नजर आ रहा है।

ये है भारतीय रुपया का हाल
भारतीय रुपये में आज आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती देखी जा रही है। आज भारतीय रुपया 83.48 रुपये पर पहुंच में कारोबार कर रहा है और आज 83.40-83.50 रुपये के सीमित दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है क्योंकि आरबीआई रुपये की सुरक्षा के लिए डॉलर की बिक्री जारी रखे हुए है।
इस बैठक से पहले गुरुवार को विदेशी निवेशकों की बिकावली और वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे गिरकर 83.53 पर बंद हुआ था।
रिजर्व बैंक की MPC मीटिंग के फैसले आने से शेयर बाजार में जबरदस्त जोश देखने को मिल रहा है। निफ्टी कारोबारी सेशन में 23000 के पार पहुंच गया। IT सेक्टर में सबसे ज्यादा खरीदारी हुई है। जिसमें विप्रो का शेयर 4% की उछाल के साथ निफ्टी में टॉप गेनर है।
भारतीय करेंसी पर क्या बोला आरबीआई?
आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि भारतीय रुपया अपनी स्थिरता बनाए रखा है और 10 साल के नोट पर कोई बदलाव नहीं हुआ है।
रेपो रेट में नहीं हुआ बदलाव
आरबीआई एमपीसी की तीन दिन की बैठक 5 सा 7 जून तक थी। आज शक्तिकांत दास ने इस बात की जानकारी दी कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह फैसला MPC के 6 में से 4 सदस्यों ने रेट को स्थिर रखने पर फैसला किया है।
केंद्रीय रिजर्व बैंक ने आखिरी बार फरवरी, 2023 में रेपो रेट में बढ़ोतरी की थी। इस बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 6.5 प्रतिशत कर दी गई। आज फिर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया यानी रेपो रेट को 6.5 फीसदी पर स्थिर रखा गया है। इसके बाद लगातार 8 बार केंद्रीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक हो चुकी है। जिसका मतलब है कि वाहन, घर, आदि समेत पर्सनल लोन पर मासिक किस्त (ईएमआई) में बदलाव की संभावना कम है।ब्याज दरों में कटौती से आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन आरबीआई इस समय महंगाई को नियंत्रित करने को प्राथमिकता दे रहा है।
उनका यह भी मानना है कि मौजूदा ब्याज दरों को बनाए रखने से महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और इससे कुछ आर्थिक वृद्धि भी होती है।
आपको बता दें कि शक्तिकांत दास ने यह भी कहा है कि आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 के लिए वास्तविक जीडीपी 7.2 फीसदी रह सकती है। पहली तिमाही में जीडीपी 7.3 फीसदी, दूसरी में 7.2 फीसदी, तीसरी तिमाही में 7.3 फीसदी तो चौथी तिमाही में 7.2 फीसदी की से रफ्तार से बढ़ सकती है। इसके अलावा वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान बरकार रखा गया है।


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