RBI MPC Meet: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की FY26 की पहली मौद्रीक समीक्षा कमिटी मीटिंग आज 9 अप्रैल को खत्म हो गई है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अप्रैल में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती करने का फैसला लिया है। रेपो रेट अब 6% पर आ गया है।
इससे पहले फरवरी 2025 की मीटिंग में भी 6 सदस्यों की कमिटी ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती का ऐलान किया गया था। आरबीआई के द्वारा रेपो रेट में कटौती करने का असर आपके बैंक एफडी पर मिलने वाला ब्याज पर भी पड़ता है।

आपकी एफडी रेट पर पड़ेगा असर
आरबीआई के द्वारा की गई रेपो रेट की कटौती से कई बैंक एफडी पर दिए जाने वाले ब्याज को भी कम कर सकते हैं। कई बैंकों ने एफडी ब्याज दरों को रिवाइज्ड किया है। यस बैंक ने कुछ अवधि पर अपनी FD दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। पंजाब एंड सिंध बैंक ने भी ब्याज दरों को अपडेट किया है। बैंक ने 33 दिन और 555 दिन वाला FD का ऑप्शन खत्म कर दिया है, जिस पर 7.72% और 7.45% की दर से ब्याज मिलता था। इसके अलावा इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने भी एफडी पर मिलने वाली ब्याज दरों को कम कर दिया है। अब रेपो रेट में कटौती के बाद ग्राहकों को एफडी पर ऑफर किए जाने वाले ब्याज दरों को बैंक कम करने की तैयारी कर सकते हैं।
क्या है रेपो रेट?
रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर आरबीआई देशभर के बैंकों को लोन देता है। ऐसे में जब रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है, तो बैंकों के लिए आरबीआई से मिलने वाला लोन महंगा हो जाता है और वो ग्राहकों के कर्ज को भी महंगा कर देते हैं। वहीं, जब रेपो रेट में कटौती होती है, तो बैंकों को केंद्रीय बैंक से सस्ते में लोन मिलता है। इसका फायदा बैंकों द्वारा ग्राहकों को देने की संभावना बढ़ जाती है। इससे लोन सस्ते होने का रास्ता खुल जाता है और आपकी EMI का बोझ कुछ कम होने की उम्मीद बढ़ती है।
इस वजह से कम मिलेगा एफडी पर ब्याज
बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर अधिक ब्याज देकर उसे ग्राहकों के लिए आकर्षित बनाते हैं, ताकि लोग बैंकों की एफडी में ज्यादा से ज्यादा पैसा डिपॉजिट करें और उससे बैंक अपनी आर्थिक कामों को सुचारू रूप से चला सकें। जब आरबीआई रेपो रेट में कटौती करता है, तो बैंक कम लागत पर धन उधार ले सकते हैं। ऐसे में बैंकों को एफडी पर अधिक ब्याज दरों को ऑफर करने की आवश्यकता नहीं रहती है। इस वजह से बैंक अपनी FD पर ब्याज दरें कम कर देते हैं।


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