RBI MPC Meet April 2025: रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन की बैठक आज 9 अप्रैल को खत्म हुई है। FY26 की पहली एमपीसी बैठक में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती गई है। अब रेपो रेट 6% पर आ गया है। इसके साथ ही आरबीआई गवर्नर ने यूपीआई ट्रांजैक्शन लिमिट पर भी ऐलान किया है।

आरबीआई ने UPI ट्रांजैक्शन लिमिट को बढ़ाया (Revised UPI Transaction Limit)
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया है कि यूपीआई के जरिए Person-to-Merchent को किए जाने वाले लेनदेन की लिमिट को 2 लाख रुपये तक बढ़ाएगा और इसे लागू करने का निर्णय एनपीसीआई को दिया जाएगा।
इस फैसले का फोकस डिजिटल पेमेंट स्ट्रचर को आसान और फ्लेक्सिबल बनाना भी है। इसके साथ ही ये भी जानकारी दी गई है कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) यूपीआई पेमेंट के लिए लेनदेन की लिमिट ₹1 लाख पर ही रखी गई है।
ये है यूपीआई ट्रांजैक्शन लीमिट (UPI Transaction Limit News)
फिलहाल Person-to-Person (P2P) ₹1 लाख की यूपीआई ट्रांजैक्शन लिमिट है। वहीं, Person-to-Merchant (P2M) के लिए ₹1 लाख और Merchant-to-Merchant (M2M) ₹1 लाख यूपीआई लेनदेन लिमिट निर्धारित की हुई है। एनपीसीआई इन स्पेसिफिक ट्रांजैक्शन में (P2M और M2M) की लिमिट को बढ़ा सकता है, जैसे ₹2 लाख या ₹5 लाख तक भी इसे कर सकता है।
NPCI को मिलेगी ये जिम्मेदारी
इससे एनपीसीआई को अधिकार मिल गया है कि वो मर्चेंट से लेनदेन के लिए UPI लिमिट को बैंकों से चर्चा कर बदल सकेगा और इससे बड़े बिजनेस और महंगी खरीदारी में UPI पेमेंट करना आसान हो जाएगा। डिजिटल पेमेंट सिस्टम और बिजनेस ट्रांजेक्शन दोनों को ही इससे फायदा मिलेगा। अगर एनपीसीआई चाहे तो वह UPI लिमिट को आने वाले समय में घटा भी सकती है यानी अब P2M और M2M ट्रांजेक्शनों की लिमिट को जरूरतों के हिसाब से बदला जा सकेगा।
आरबीआई समय-समय पर यूपीआई से जुड़े बदलाव करती रहती है ताकि यूपीआई ऐप्स के जरिए ग्राहकों को ज्यादा सहूलियत मिल सके।


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