RBI Repo Rate: देश के केंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक ने आज 6 जून को बड़ी खुशखबरी दी है. हर 2 महीने में होने वाली मौद्रिक समीक्षा कमिटी (MPC) की तीन दिवसीय मीटिंग खत्म हो गई है. इसके तहत 6 सदस्यी वाली कमिटी में ब्याज दरों को घटाने पर सहमित जताई है. कमिटी के अध्यक्ष और रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दरों में कटौती की जानकारी दी है. RBI MPC की जून पॉलिसी में ब्याज दरों में 50 बेसिस पॉइंट्स घटाने का ऐलान किया है. यह लगातार तीसरा मौका है जब दरों में कटौती की गई है.
रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि नीतिगत दरों में 50 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की मंजूरी मिली है. यानी अब पॉलिसी रेट घटकर 5.50% पर आ गया है, जोकि अप्रैल पॉलिसी में 6% पर था. साथ ही स्टांस को अकोमोडेटिव से न्यूट्रल स्टांस करने का ऐलान किया है.
RBI की प्रमुख दरें
- रेपो रेट: 5.5%
- SDF रेट: 5.25%
- MSF रेट: 5.75%
महंगाई और आर्थिक ग्रोथ को लेकर अनुमान
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने महंगाई को लेकर ऐलान किया है. इसके तहत उन्होंने बताया कि FY26 के लिए महंगाई का अनुमान 3.7% है, जोकि पहले 4% था. नए फाइनेंशियल ईयर के लिए रियल GDP ग्रोथ अनुमान 6.5% पर बरकरा रखा है. उन्होंने कहा कि एग्री सेक्टर की स्थिति मजबूत बनी हुई है. ग्रामीण मांग स्थिर है, लेकिन शहरी मांग में इजाफा देखने को मिल रहा है.
RBI क्यों घटता या बढ़ता है रेपो रेट?
बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन के चलते दुनियाभर के सेंट्रल बैंक ने महंगाई पर काबू पाने के लिए दरों में इजाफा किया. इसमें भारत का केंद्रीय बैंक यानी RBI भी शामिल है. सेंट्रल बैंक के पास रेपो रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक मजबूत हथियार है. ऐसे में जब भी महंगाई काबू से बाहर निकल जाती है या फिर निकलने लगती है तब RBI रेपो रेट में बदलाव करता है.

इससे अर्थव्यस्था में लिक्विडिटी फ्लो को कम करने की कोशिश की जाती है. यानी रेपो रेट हाई होगा तो बैंकों को RBI से मिलने वाला लोन महंगा मिलेगा. इसके चलते बैंक ग्राहकों को ज्यादा ब्याज दरों पर लोन बांटेंगे. नतीजनत, इकोनॉमी में लिक्विटी का फ्लो गिर जाएगा. और जब मनी फ्लो गिरेगा तो महंगाई घट जाएगी.
इसके ठीक उलट जब इकोनॉमी में लिक्विडिटी का फ्लो बढ़ाना होता है तब रिजर्व बैंक रेपो रेट को कम कर देती है. रेपो रेट कम होने से बैंकों को कम ब्याज पर RBI से लोन मिलता है. इससे ग्राहकों को भी लोन ब्याज दरों पर सस्ते में मिलता है. नतीजनत, इकोनॉमी की रफ्तार को जोश मिलता है. इसे उदाहरण से समझते हैं....कोरोना महामारी के समय आर्थिक संकट में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट घटाकर आर्थिक ग्रोथ में जोश भरने का काम किया.
रिवर्स रेपो रेट में बदलाव से कितना पड़ता है असर?
MPC पॉलिसी में रेपो रेट के साथ रिवर्स रेपो रेट का भी ऐलान किया जाता है. रिवर्स रेपो रेट उसे कहते है जिस रेट पर रिजर्व बैंक बैंकों को पैसा रखने पर ब्याज देता है. रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी कर RBI बाजार में नकदी को कम करता है. वहीं, बैंक RBI के पास अपनी होल्डिंग के लिए ब्याज लेकर इसका फायदा उठाते हैं. सेंट्रल बैंक इकोनॉमी में महंगाई बढ़ने के दौरान रिवर्स रेपो रेट बढ़ाता है, जिससे बैंकों के पास ग्राहकों को लोन देने के लिए फंड कम हो जाता है.
More From GoodReturns

भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें

Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?

Gandhar Oil Refinery के शेयर में लगा अपर सर्किट! मुनाफा और रेवेन्यू ने किया कमाल, अब क्या होगा?

US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति

GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित

ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान

चेन्नई रेल अपडेट: आज रात कई ट्रेनें रद्द, सफर से पहले चेक करें अपना रूट और टाइमिंग

आज खुले 3 बड़े IPO: Indo-MIM, Xtranet और Lohia Corp में निवेश का मौका, जानें क्या है सही रणनीति

Russia ने 6 महीने में बेच दिया 44 टन सोना! रूस क्यों घटा रहा है अपना Gold Reserve?

मुंबई बारिश अलर्ट: बैंकिंग ठप होने पर पैसे की किल्लत से कैसे बचें? जानें स्मार्ट तरीके

Indo-MIM Listing Today: आज बाजार में होगी धमाकेदार एंट्री! लिस्टिंग के बाद शेयर बेचने का सही तरीका



Click it and Unblock the Notifications