RBI on Inflation: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के नतीजों की घोषणा आज, 1 अक्टूबर को की गई। आरबीआई ने रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर ही रखा। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा क कि GST को तर्कसंगत बनाने से महंगाई पर नरमी का असर पड़ने की संभावना है, साथ ही उपभोग और विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

महंगाई पर RBI
हाल के महीनों में समग्र महंगाई का परिदृश्य अधिक अनुकूल हो गया है, जिसमें मुख्य महंगाई जून में 3.7% से घटकर अगस्त में 3.1% हो गई है। हाल ही में इसे और घटाकर 2.6% कर दिया गया है। टैरिफ संबंधी फैसलों से विकास दर में कमी आने की संभावना है। इसलिए इस साल की चौथी तिमाही और अगले वर्ष की पहली तिमाही के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को कम करके संशोधित किया गया है और प्रतिकूल आधार प्रभावों के बावजूद, मोटे तौर पर लक्ष्य के अनुरूप है।
कोर महंगाई 4.2% रही, जो यह दिखाता है कि मूल्य दबाव काफी हद तक कंट्रोल बना हुआ है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इस साल के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति अब 2.6% रहने का अनुमान है। दूसरी और तीसरी तिमाही में 1.8%, चौथी तिमाही में 4% और अगले वर्ष पहली तिमाही में 4.5%। जोखिम समान रूप से संतुलित हैं।
GDP पर RBI
साल के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि को पूर्व के अनुमान 6.5% से संशोधित कर 6.8% कर दिया गया है, जो अपेक्षा से अधिक मजबूत आर्थिक प्रदर्शन को दिखाता है।
RBI MPC की बैठक
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में छह सदस्यों वाली यह तीन दिवसीय बैठक 29 सितंबर को शुरू हुई थी। विचार-विमर्श का यह दौर भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की बीच हो रहा है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ में 25% की अतिरिक्त वृद्धि (27 अगस्त से प्रभावी) के हालिया फैसले के बाद शुरू हुई है, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया है।
इन निगोशिएशन की प्रगति भारत के आर्थिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। MPC की बैठक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के 2025 में पहली बार ब्याज दर में कटौती के बाद हो रही है, जिसमें उसने अपनी बेंचमार्क दर को 25 आधार अंकों से घटाकर 4-4.25% कर दिया है।


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