RBI Monetary Policy Highlights GDP Growth: RBI की मॉनिटरी पॉलिसी बैठक में कमिटी के 6 सदस्यों में से 4 सदस्यों ने पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं करने पर अपनी सहमति जताई है। रिजर्व बैंक ने लगातार 9वीं बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और RBI गवर्नर शक्तिकांता दास ने रेपो रेट को 6.5% पर बरकरार रखा है। आइए आपको बताते हैं कि जीडीपी ग्रोथ रेट को लेकर क्या अनुमान है।

GDP ग्रोथ रेट को लेकर संभावना
शक्तिकांता दास ने FY25 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.2% रहने का अनुमान स्थिर रखा है। पहली तिमाही के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 7.3% से घटाकर 7.1% कर दिया है, वहीं, Q2 के लिए 7.2%, Q3 के लिए GDP ग्रोथ 7.3% और Q4 के लिए 7.2% GDP ग्रोथ का अनुमान पहले की तरह स्थिर रखा है।
FY25 में CPI महंगाई अनुमान 4.5% बरकरार
रिजर्व बैंक गवर्नर ने FY25 के लिए रिटेल महंगाई के अनुमान को 4.5% पर बरकरार रखा है और दूसरी तिमाही में CPI महंगाई दर 4.4% का अनुमान पर रहने का अनुमान जताया है। Q3 में 4.7% और Q4 में 4.3% CPI महंगाई का अनुमान जताया है। FY26 की पहली तिमाही में CPI महंगाई 4.4% रहने का अनुमान है।
बैठक में कई अन्य फैसले भी लिए गए
रिजर्व बैंक ने UPI के माध्यम से टैक्स पेमेंट की लिमिट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है और अनऑथराइज्ड खिलाड़ियों पर लगाम लगाने के लिए डिजिटल लेंडिंग ऐप्स का एक पब्लिक रिपॉजिटरी बनाने का भी प्रस्ताव दिया है।
इसके अलावा RBI गवर्नर ने बताया कि वह नियम उल्लंघन रोकने के लिए काफी सख्त हो गया है और इसके लिए केंद्रीय बैंक इसके लिए फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है। बैंकों के लिए नियम पालन करना बेहद अहम है।
आरबीआई गवर्नर ने ये भी बताया है कि 2 अगस्त 2024 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 675 अरब डॉलर तक पहुंच गया था और FDI रिकॉर्ड उच्च स्तर पर हैं। सिर्फ यही नहीं, उन्होंने ये भी कहा है कि कई बैंक ब्याज दरों में कटौती की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि कुछ ब्याज दरों में कटौती के मूड में हैं।
आने वाले भविष्य में वैश्विक वृद्धि के लिए सकारात्मक वृद्धि दिख रही है, लेकिन चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ भी कई कारक चुनौतियां पेश हो रही हैं। वैश्विक व्यापार की संभावनाओं में सुधार से बाहरी मांग में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, लंबे समय तक भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और भू-आर्थिक विखंडन से नकारात्मक जोखिम पैदा हो सकता है। इसके अलावा ये भी जानकारी दी है कि कृषि गतिविधियों में सुधार से ग्रामीण खपत में सुधार हुआ है, साथ ही उन्होंने कहा कि शहरी खपत भी बढ़ रही है।
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