RBI Monetary Policy Meeting News: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की इस मॉनिटरी पॉलिसी समिति की बैठक पर लगभग सभी का ध्यान था। इस दौरान आरबीआई ने कई बड़े फैसले भी किए हैं। गवर्नर ने रेपो रेट में कोई खास बदलाव नहीं किया है। इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यूपीआई पेमेंट की लिमिट को बढ़ाकर भी 5 लाख रुपए कर दिया है। ऐसा लगातार पांचवीं बार हुआ है जब रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने ब्याज दर में किसी भी तरह का परिवर्तन नहीं किया है।
आरबीआई ने बढ़ाया जीडीपी ग्रोथ का अनुमान
रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के गवर्नर ने वित्त वर्ष 24 के लिए सकल घरेलू उत्पाद में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार फाइनेंशियल ईयर 24 में जीडीपी 6.5 प्रतिशत से बढ़कर 7 प्रतिशत होने वाली है। प्रोजेक्टेड जीडीपी का बढ़ाया जाना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छी खबर भी है।

आपको बताते चले की फाइनेंसियल ईयर 24 की दूसरी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े आरबीआई के उम्मीद से काफी बेहतर रहे थे। इसी बात को देखते हुए वित्त वर्ष 2024 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी के करीब कर दिया गया है। आरबीआई के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 में महंगाई दर 5.4 फीसदी पर बरकरार रह सकती है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दी गई जानकारी जानकारी और मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ग्रॉस डेवलपमेंट प्रोडक्ट वित्त वर्ष 2024 में 7 फीसदी का अनुमान लगाया जा रहा है। पहले 6.5 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया गया था जिसे बाद में आरबीआई के द्वारा 7 परसेंट कर दिया गया। वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही में जीडीपी का अनुमान 6.4 प्रतिशत का है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष24 की तीसरी तिमाही में को 6 प्रतिशत रखा गया था।
महंगाई दर कम करने की कोशिश
आपको बताते चलें कि अक्टूबर में इन्फ्लेशन रेट 4.87 प्रतिशत रहा था। नवंबर महीने का इन्फ्लेशन रेट अगले हफ्ते तक आने की उम्मीद है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के अनुसार का महंगाई दर को कम करने के प्रयास लगातार जारी हैं। जिसे 4 प्रतिशत पर लाने की कोशिश की जा रही है।
गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है, तो इससे लोन पर लगने वाले ब्याज में कोई ज्यादा बदलाव आने की संभावना भी नहीं है।
लोन पर ब्याज दर रह सकती हैं स्थिर
आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी पर हुई बैठक का असर शेयर बाजारों पर भी देखा है और शेयर में भी तेजी दर्ज की जा रही है।
आपको बताते चलें कि आरबीआई पॉलिसी के अनुसार अभी फिक्स्ड डिपॉजिट पर बेहतर इंटरेस्ट रेट मिलता रहेगा। रेपो रेट वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक कॉमर्सियल बैंकों को पैसा उधार देता हैं। रेपो रेट और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) सहित विभिन्न बचत साधनों पर ब्याज दरों के बीच सीधा संबंध है। जैसे-जैसे रेपो दर बढ़ती है, वैसे-वैसे एफडी ब्याज दर भी बढ़ती है। बैंक अक्सर रेपो रेट में बदलाव के आधार पर ब्याज दरों में संशोधन करते हैं। आरबीआई ब्याज दरों पर फैसला करते समय रिटेल महंगाई दर पर गौर करता है।
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