नयी दिल्ली। आरबीआई ने लक्ष्मी विलास बैंक पर 1 महीने के लिए प्रतिबंध लगाए हैं। ये प्रतिबंध मोरेटोरियम के रूप में लगाए गए हैं, जिसके चलते बैंक में कामकाज नहीं हो सकेगा। इससे बैंक के खाताधारकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। प्रत्येत खाताधारक को केवल 25 हजार रु तक ही निकालने की अनुमति होगी। आरबीआई ने एक बयान में कहा है कि लक्ष्मी विलास बैंक की वित्तीय हालत पिछले 3 सालों में लगातार खराब हुई है। इस दौरान बैंक को लगातार घाटा हुआ है। आरबीआई के अनुसार एडवांसेज के घटने और एनपीए बढ़ने से आगे भी बैंक को और घाटा होने की संभावना है। घाटे से निपटने के लिए बैंक पर्याप्त पूंजी जुटाने में सक्षम नहीं है।
गंभीर प्रशासनिक मामले सामने आए
केंद्रीय बैंक ने कहा है कि ग्राहक लक्ष्मी विलास बैंक में से लगातार कैश निकाल रहे हैं। इसकी लिक्विडिटी भी काफी नीचे चली गई है। हाल के सालों में बैंक में गंभीर प्रशासनिक मामले भी सामने आए हैं। इसके बाद 31 मार्च 2019 को पीसीए नियमों के उल्लंघन लक्ष्मी विलास बैंक को सितंबर 2019 में प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) फ्रेमवर्क के तहत रखा गया था।
कितना हुआ घाटा
बैंक को 30 सितंबर को समाप्त तिमाही में 396.99 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। वहीं इसकी ग्रॉस एनपीए अनुपात 24.45 प्रतिशत था। पिछले वर्ष की सितंबर तिमाही में बैंक को 357.17 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। आरबीआई ने डीबीएस बैंक इंडिया के साथ लक्ष्मी विलास बैंक की विलय योजना का मसौदा तैयार किया है। इसका लक्ष्य प्रतिबंध अवधि समाप्त होने से पहले इसे विलय करना है। इसी तरह की स्थिति पिछले साल सितंबर में पीएमसी बैंक और इस साल मार्च में यस बैंक में सामने आई थी।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर
आरबीआई ने लक्ष्मी विलास बैंक के जमाकर्ताओं को आश्वासन दिया है कि उनके हितों की पूरी तरह से रक्षा की जाएगी और उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। आरबीआई ने बैंक की वित्तीय स्थिति खराब होने के कारण बैंक के बोर्ड को 30 दिनों की अवधि के लिए निलंबित कर दिया है। केंद्रीय बैंक की तरफ से कहा गया है कि जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए ऐसा किया गया है।


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