नई दिल्ली, जुलाई 14। देश में ज्यादातर को-ऑपरेटिव बैंक लापारवाही के साथ कार्य कर रहे हैं। यही कारण है कि आरबीआई या तो इन को-ऑपरेटिव बैंकों को बंद करता जा रहा है, या फिर भारी जुर्माना लगा रहा है। जुर्माना लगाने का साधा सा मतलब है कि उस को-ऑपरेटिव बैंक के कामकाग में भारी दिक्कतें हैं। अभी बीते हफ्ते आरबीआई ने 4 को-ऑपरेटिव बैंकों को बंद करने की कार्रवाई शुरू की है। वहीं एक हफ्ता भी नहीं बीता है कि आरबीआई ने 3 और को-ऑपरेटिव बैंकों पर कार्रवाई कर दी है।
आरबीआई ने 3 को-ऑपरेटिव बैंकों पर लगाया जुर्माना
आरबीआई बीते सोमवार को नियमों का पालन न करने के आरोप में 3 को-ऑपरेटिव बैंकों पर जुर्माना लगा दिया है। आरबीआई के अनुसार महाराष्ट्र स्थित दि नासिक मर्चेंट को-ऑपरेटिव बैंक, सहित तीन सहकारी बैंकों पर जुर्माना लगा गया है। बाकी दो को-ऑपरेटिव बैंकों के नाम हैं महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक, मुंबई और नेशनल सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, बेतिया।
जानिए किस को-ऑपरेटिव बैंक पर कितना लगाया है जुर्माना
आरबीआई ने एक बयान जारी कर बताया है कि उसने नाबार्ड की तरफ से 'धोखाधड़ी- क्लासिफिकेशन, रिपोर्टिंग और निगरानी के लिए दिशानिर्देश' पर जारी निर्देशों का पालन न करने के लिए महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक, मुंबई पर 37.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं नासिक मर्चेंट के सहकारी बैंक पर 'अन्य बैंकों के साथ जमा की नियुक्ति' और 'जमा पर ब्याज दर' पर आरबीआई के जारी निर्देशों के उल्लंघन के लिए 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा नेशनल सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, बेतिया पर डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड और नो योर कस्टमर (केवाईसी) मानदंडों के प्रावधानों का पालन न करने पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
जानिए बैंक ग्राहकों पर क्या होगा इसका असर
आरबीआई ने साफ किया है कि इन तीनों बैंकों पर लगा यह जुर्माना रेगुलेटरी कंप्लायंस में कमियों के आधार पर लगाया गया है। आरबीआई के अनुसार इसका उद्देश्य बैंकों की तरफ से अपने ग्राहकों के साथ किए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैलिडिटी पर कमेंट करना नहीं है। आरबीआई के अनुसार इन जुर्मानों से बैंक के ग्राहकों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।


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