
RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सीआईआई के एक कार्यक्रम में कहा है कि देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए 7 फीसदी से ज्यादा रह सकती है।
गवर्नर शक्तिकांत दास की तरफ से यह भी कहा गया है कि इस बात की संभावना है कि पिछले फाइनेंशियल ईयर के लिए जीडीपी वृद्धि ज्यादा हो सकती है।
गवर्नर की तरफ से कहा गया है कि आरबीआई के द्वारा निगरानी किए गए करीब सभी हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से पता चलता है कि पिछले फाइनेंशियल ईयर की आखिरी तिमाही में गति बनी हुई थी उन्होंने यह आश्चर्य की बात नहीं होगी। अगर देश की अर्थव्यवस्था 7 फीसदी से अधिक बढ़ती है।
दास की तरफ से कहा गया है कि कृषि सेक्टर ने एक बेहतर प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही सेवा क्षेत्र ने भी काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही कैपेक्स और इंफ्रा खर्च में बढ़ोतरी हुई है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि स्टील और सीमेंट सेक्टर में सुधार दिखाई देने वाले संकेतों के प्रमाण है इसके साथ ही साथ निजी निवेश के पुनरुद्धार के भी प्रमाण हैं।
उन्होंने कहा है कि आरबीआई के नवीनतम सर्वेक्षण के मुताबिक विनिर्माण सेक्टर में क्षमता का इस्तेमाल करीब 75 फीसदी है लेकिन जो सीआईआई सर्वेक्षण है। यह इसको और भी ज्यादा दर्शाता हैं।
दास ने कहा कि देश को चालू फाइनेंशियल ईयर में 6.5 फीसदी के लगभग विकास की दर को दर्ज करनी चाहिए। हालांकि, इसमें गिरावट का जोखिम है।
आरबीआई को यह उम्मीद है कि खुदरा मुद्रास्फीति का अगला प्रिंट 4.7 फीसदी से कम रहेगा। उन्होंने यह भी कहा है कि महंगाई के खिलाफ हमारी जंग अभी खत्म नहीं हुई है। हमें सतर्क रहना होगा।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्ति कांत दास की तरफ से कहा गया है कि एक सुझाव है कि आरबीआई आने की आरबीआई आगामी मौद्रिक नीति बैठकों में विराम लेगा।


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