New RBI Deputy Governor: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की नई डिप्टी गवर्नर के रूप में प्रख्यात भारतीय अर्थशास्त्री पूनम गुप्ता को नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 3 साल का होगा। इससे पहले जनवरी 2025 में माइकल देबव्रत पात्रा ने पद छोड़ दिया उनके बाद अब छोड़ने के बाद जनवरी 2025 से इस पद पर अब नियुक्ति हुई है।

पूनम गुप्ता ने इन पदों पर किया है काम (Poonam Gupta)
वर्तमान में, पूनम गुप्ता नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की महानिदेशक के रूप में कार्यरत हैं। अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाने वाली, उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी की है और दुनिया भर के शीर्ष संस्थानों के साथ काम किया है। 2021 से, वह भारत के प्रमुख आर्थिक अनुसंधान संस्थान का नेतृत्व कर रही हैं।
पूनम गुप्ता के करियर में विश्व बैंक और IMF में अहम रोल शामिल हैं। इन संस्थानों में, उन्होंने उभरती अर्थव्यवस्थाओं और वैश्विक आर्थिक नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया। उनके काम में अलग-अलग विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में रिसर्च और नीति सलाहकार की भूमिकाएं शामिल थीं।
विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में भी किया है काम (Deputy Governor of RBI)
अपनी इंस्टिूशनल भूमिकाओं के अलावा, पूनम गुप्ता ने कई शैक्षणिक संस्थानों में विजिटिंग प्रोफेसर और रिसर्च के रूप में योगदान दिया है। मौद्रिक नीति, आर्थिक सुधार, विनिमय दर जैसे कई विषयों पर उनके रिसर्च पेपर कई प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित भी हुए हैं।
इसके अलावा वह आईएमएफ में भी अर्थशास्त्री के रूप में कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने काम के दौरान विशेष रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाओं और वैश्विक आर्थिक नीतियों पर फोकस भी किया है। इन संस्थानों में काम करने के साथ ही पूनम गुप्ता कई शैक्षणिक संस्थानों में विजिटिंग प्रोफेसर और रिसर्चर के रूप में भी काम कर चुकी हैं।
उनके पास IMF और वर्ल्ड बैंक में काम करने का 20 से अधिक सालों का अनुभव है। वह नीति आयोग व FICCI की सलाहकार समितियों में सदस्य भी रहीं हैं। पिछले साल 9 दिसंबर को संजय मल्होत्रा को भारतीय रिजर्व बैंक का नया गवर्नर नियुक्त किया गया था। पूनम गुप्ता के योगदान से उनके कार्यकाल के दौरान भारत की मौद्रिक नीति परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है।
इससे पहले इस पद पर रहे माइकल देबव्रत पात्रा
चौथा डिप्टी गवर्नर के रूप में नियुक्त हुए माइकल पात्रा आरबीआई के डिप्टी गवर्नर के रूप में नियुक्त हुए थे। उन्होंने आईआईटी मुंबई से पीएचडी की है। वे हार्वर्ड विश्वविद्यालय के फेलो भी हैं, जहां उन्होंने वित्तीय स्थिरता पर अपना पोस्ट डॉक्टरेट शोध किया। पात्रा 1985 में आरबीआई में शामिल हुए। तब से उन्होंने शीर्ष बैंक में कई भूमिकाएँ निभाई हैं। 2005 में मौद्रिक नीति विभाग में जाने से पहले उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय वित्त, धन और बैंकिंग के प्रभारी आर्थिक विश्लेषण और नीति विभाग में सलाहकार के रूप में काम किया।
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