बैंकिंग सिस्टम में नकदी (liquidity) की किल्लत को दूर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस हफ्ते 5 अरब डॉलर की 'डॉलर-रुपया स्वैप' नीलामी करने जा रहा है। दरअसल, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमजोरी ने हाल के दिनों में वित्तीय स्थिरता पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी को देखते हुए केंद्रीय बैंक 26 मई को होने वाली इस नीलामी के जरिए बाजार में रुपये का फ्लो बढ़ाएगा।
डॉलर-रुपया स्वैप की प्रक्रिया में RBI बैंकों से डॉलर लेता है और उसके बदले बाजार में उतनी ही वैल्यू के रुपये जारी करता है। साथ ही, एक तय तारीख पर इस सौदे को वापस पहले जैसा करने का समझौता भी किया जाता है। इस तरीके से RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार (reserves) को कम किए बिना बाजार में नकदी बढ़ा पाता है। इससे भारतीय बैंकों के पास रोजमर्रा के कामकाज और लोन देने के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध रहता है।

लिक्विडिटी पर RBI के एक्शन का FD दरों पर असर
आम बैंक ग्राहकों के लिए नकदी का यह फ्लो ब्याज दरों में होने वाली तेज बढ़ोतरी को रोक सकता है। जब बाजार में कैश की कमी होती है, तो बैंक फंड जुटाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरें बढ़ा देते हैं। इसका सीधा असर होम लोन की EMI पर पड़ता है, जो महंगी हो जाती है। बाजार में नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित कर RBI लोन की दरों को स्थिर रखने और करेंसी मार्केट को संभालने की कोशिश कर रहा है।
| फीचर | संभावित फायदा |
|---|---|
| बाजार में कैश | बेहतर लिक्विडिटी |
| लोन की दरें | स्थिरता बनी रहेगी |
निवेशकों को इस समय बैंकिंग और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अक्सर इंडियन ऑयल जैसी कंपनियों के मार्जिन पर बुरा असर डालती हैं। अगर रुपया स्थिर रहता है, तो इन कंपनियों की आयात लागत (import cost) कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा। इसके अलावा, बैंकों के पास कैश की स्थिति सुधरने से आमतौर पर फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में तेजी देखने को मिलती है।
डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी: आगे की राह
26 मई को होने वाली यह नीलामी भविष्य की मॉनेटरी पॉलिसी के लिहाज से एक अहम संकेत साबित होगी। एक्सपर्ट्स इस स्वैप के साथ-साथ वेरिएबल रेपो रेट (VRR) ऑपरेशंस पर भी नजर रखेंगे। अगर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहता है, तो रुपये को मजबूती देने के लिए केंद्रीय बैंक को आगे भी दखल देना पड़ सकता है। फिलहाल, नीलामी के सटीक नतीजों और अलॉटमेंट की कीमतों के आधिकारिक ऐलान तक बाजार में सावधानी भरा माहौल बना रहेगा।
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