महंगे प्याज ने नहीं होने दिया लोन सस्ता, जानें क्या हुआ

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की इस महीने के आरंभ में हुई बैठक के मिनट्स हाल ही में जारी हुए हैं। इससे यह जाहिर है कि एमपीसी के सदस्य प्याज के दाम में वृद्धि को लेकर चिंतित थे। इसका कारण खुदरा महंगाई में भारी इजाफा था, जिसमें प्याज का रोल अहम था। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में केंद्रीय बैंक ने प्रमुख ब्याज दर यानी रेपो रेट में कटौती का इस साल जो सिलसिला शुरू हुआ, उस पर दिसंबर में ही आकर विराम लगा। हालांकि इस साल आरबीआई ने रेपो रेट में 135 आधार अंकों की कटौती कर चुका है।

expensive onions

प्याज के दाम आसमान पर

गौरतलब है कि देश में प्याज की आपूर्ति का संकट पैदा होने के कारण पिछले कुछ महीने से इसका दाम आसमान पर है। बीते सप्ताह फिर प्याज का खुदरा भाव देश की राजधानी दिल्ली में 140 रुपये प्रति किलो के करीब चला गया। आरबीआई गवर्नर दास ने एमपीसी में कहा, "देश के कई हिस्सों में बेमौसम बरसात के कारण खरीफ सीजन की फसल खराब हो जाने के कारण सब्जियों के दाम, खासतौर से प्याज के भाव में काफी उछाल आया जिससे महंगाई दर में सितंबर के दौरान काफी वृद्धि हुई और यह सिलसिला अक्टूबर में भी जारी रहा।"

एमपीसी सदस्यों ने भी जताई चिंता

महंगाई में वृद्धि को लेकर एमपीसी के सदस्य चेतन घाटे ने कहा, "बीते तीन साल के दौरान इतनी बड़ी तेजी नहीं देखी गई और इसके फलस्वरूप आर्थिक विकास के मौजूदा दौर में आर्थिक नीति की अनिश्चितता भी बढ़ सकती है।" एमपीसी ने समायोजी रुख को तब तक कायम रखने का फैसला लिया जब तक आर्थिक विकास दोबारा पटरी पर न आए और महंगाई दर लक्ष्य के अधीन न बनी रहे। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर को चार फीसदी के दायरे में रखने के लक्ष्य को हासिल करने के मकसद से प्रमुख ब्याज दर में स्थिरता बनाए रखने का फैसला लिया गया।

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