क्रिप्टोकरेंसी का बाजार आजकल काफी चर्चा में है। इतना ही नहीं लोगों ने भी इसे अमीर बनने का सबसे आसान रास्ता समझ लिया था।
नई दिल्ली, फरवरी 15। क्रिप्टोकरेंसी का बाजार आजकल काफी चर्चा में है। इतना ही नहीं लोगों ने भी इसे अमीर बनने का सबसे आसान रास्ता समझ लिया था। क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर ने सोमवार को बड़ी बात कही है। क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारत का क्या नजरिया होना चाहिए इस पर आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर ने अपनी बात रखी है। बीते कल 14 फरवरी को कहा कि भारत के लिए शायद सबसे अच्छा होगा क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाना। उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी किसी पोंजी स्कीम से भी बदतर हो सकती है। शंकर ने यह बात इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के 17वें वार्षिक बैंकिंग प्रौद्योगिकी सम्मेलन और पुरस्कार कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान कही। Cryptocurrency : आज जमकर करें कमाई, बहुत तेजी से बढ़े रेट

इस दौरान उन्होंने कहा कि हम फिलहाल क्रिप्टोकरेंसी के सपोर्ट में आ रही उन दलीलों की जांच कर रहे हैं जिनमें ये कहा जा रहा है कि क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करना चाहिए। क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाया जाए या नहीं, उसको लेकर आरबीआई के डिप्टी गवर्नर का यह बयान काफी अहम है। डिप्टी गवर्नर ने कई ऐसी बाते बताईं जिनकी वजह से फाइनेंशियल सिस्टम में प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी का होना चिंताजनक हो सकता है। ऐसा पहली बार हुआ है जब आरबीआई के किसी सीनियर अधिकारी ने क्रिप्टोकरेंसी के खिलाफ खुलकर अपना पक्ष रखा है।
क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन पर 30% टैक्स लगाने का ऐलान
जबकि इससे पहले आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने क्रिप्टोकरेंसी के लेकर अपनी चिंताए जताई थी। तब उन्होंने कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी के लिए खतरा बन सकती हैं। जबकि इस साल बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन पर 30% टैक्स लगाने का ऐलान किया था। हालांकि इसके बाद उन्होंने साफ कर दिया कि क्रिप्टो पर 30% टैक्स का मतलब ये नहीं है कि यह करेंसी लीगल मानी जाएगी। इस दौरान शंकर ने आज कहा कि क्रिप्टोकरेंसी किसी देश की वित्तीय संप्रभुता के लिए खतरा है। प्राइवेट कंपनियों की तरफ से शुरू की गई इन क्रिप्टोकरेंसी का ट्रांजैक्शन इसे काफी संवेदनशील बनाते हैं। आज 14 फरवरी को ही निर्मला सीतारमण ने कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार और आरबीआई के बीच पूरी तरह तालमेल है।
क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी
क्रिप्टोकरेंसी दो शब्दों से मिलकर बना शब्द है। क्रिप्टो जोकि लैटिन भाषा का शब्द है जो क्रिप्टोग्राफी से बना है और जिसका मतलब होता है, छुपा हुआ/हुई। जबकि करेंसी भी लैटिन के करंटिया से आया है, जो कि रुपये-पैसे के लिए इस्तेमाल होता है। तो क्रिप्टोकरेंसी का मतलब हुआ छुपा हुआ पैसा, या गुप्त पैसा या डिजिटल रुपया। कैपिटल वाया ग्लोबल रिसर्च लिमिटेड के इंटरनेशनल एंड कमोडिटीज रिसर्च के लीड और क्रिप्टोकरेंसी पर गहरी पकड़ रखने वाले क्षितिज पुरोहित बताते हैं कि आमतौर पर क्रिप्टोकरेंसी एक तरह का डिजिटल पैसा है, जिसे आप छू तो नहीं सकते, लेकिन रख सकते हैं। यानी यह मुद्रा का एक डिजिटल रूप है। यह किसी सिक्के या नोट की तरह ठोस रूप में आपकी जेब में नहीं होता है। यह पूरी तरह से ऑनलाइन होता है।
कैसे काम करती है क्रिप्टोकरेंसी
पिछले कुछ सालों से क्रिप्टोकरेंसी मुद्राओं की लोकप्रियता बढ़ी है। इन्हें ब्लॉकचेन सॉफ़्टवेयर के ज़रिए इस्तेमाल किया जाता है। ये डिजिटल मुद्रा इनक्रिप्टेड यानी कोडेड होती हैं। इसे एक डिसेंट्रेलाइज्ड सिस्टम के जरिए मैनेज किया जाता है। इसमें प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल सिग्नेचर द्वारा वेरिफिकेशन होता है। क्रिप्टोग्राफी की मदद से इसका रिकॉर्ड रखा जाता है। क्षितिज बताते हैं कि इसके जरिए खरीदी को क्रिप्टो माइनिंग कहा जाता है क्योंकि हर जानकारी का डिजिटल रूप से डेटाबेस तैयार करना पड़ता है। जिनके द्वारा यह माइनिंग की जाती है, उन्हें माइनर्स कहा जाता है।


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