Sovereign Gold Bonds: RBI ने किया ऐलान, SGB की मैच्योरिटी से पहले निकासी पर इतना मिलेगा पैसे

Rate for premature redemption of Sovereign Gold Bond: आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2017-18 सीरीज IV और 2018-19 सीरीज के अनुसार जिन लोगों ने निवेश किया था।

आरबीआई ने निवेशकों को मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालने की छूट भी दी है।

Sovereign Gold Bond

आरबीआई के मुताबिक 6 अक्टूबर, 2017 और 8 अक्टूबर 2018 की भारत सरकार के नोटिफिकेशन के अनुरूप है। इसमें गोल्ड बॉन्ड खरीदे जाने के 5 साल पूरे होने के बाद अगले ब्याज की तिथि पर इसे प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की अनुमति दी जा सकती है।

जानिए क्या है प्रीमैच्योर रिडेम्पशन प्राइस

आरबीआई ने एसजीबी के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्पशन प्राइस 7260 रुपये प्रति यूनिट तय किया गया है, जिसकी गणना पिछले तीन कारोबारी दिनों में सोने की कीमतों के औसत के आधार पर की गई है। आपको बता दें कि यह मूल्य 23 अप्रैल से शुरू होने वाले बॉन्ड के प्रीमैच्योर रिडेम्पशन के लिए मूल्य 18, 19 और 22 अप्रैल के लिए सोने की कीमतों के साधारण औसत के आधार पर एसजीबी की प्रति यूनिट तय किया गया है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने के फायदे

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने के कई सारे फायदे हैं और इन बॉन्ड्स को RBI की तरफ से जारी किया जाता है और उन्हें सरकारी गारन्टी के साथ दिया जाता है इसलिए निवेशकों को इसमे फायदे होने की संभावना अधिक होती है।

आपको बता दें कि इसपर सालाना 2.4 फीसदी का ब्याज मिलता है, जिसका हर छह महीने पर भुगतान किया जाता है। लेकिन, बाजार में भाव बढ़ने पर आपके निवेश का मूल्य भी बढ़ता है।

इसमें निवेश करने पर सरकार आपके सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड निवेश पर एक निश्चित वार्षिक ब्याज दर प्रदान करती है।

इस ब्याज भुगतान को दो भागों में बांटा गया है और निवेशक को हर 6 महीने में भुगतान किया जाता है। भले ही सोने की कीमत बढ़े या गिरे, आपको ब्याज मिलने की गारंटी होती है।

फिजिकल सोने को स्टोर करने की टेंशन हर किसी को होती है लेकिन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड डीमैट फॉर्मेट और डॉक्यूमेंट्स में होता है इसलिए इसे स्टोर करने की टेंशन नहीं होती है।

आपको सोने की सुरक्षा के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है और न ही बैंक लॉकर में रखने के लिए एनुअल चार्ज का भुगतान नहीं करना होता है।

आपके सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड निवेश से प्राप्त ब्याज पर कोई टीडीएस लागू नहीं होता है। आपको मैच्योरिटी से पहले बांड को ट्रांसफर करने और इंडेक्सेशन लाभ प्राप्त करने की भी अनुमति है।

इसके साथ ही अगर आप मैच्योरिटी के बाद बांड तोड़ते हैं, तो कैपिटल गेन टैक्स से भी छूट मिलती है।

वहीं अगर इसके नुकसान की बात करें तो अगर सोने की कीमतों में गिरावट आती है तो इसका नुकसान केवल निवेशक को ही उठाना पड़ता है।

सोने की कीमतों में गिरावट गोल्ड बॉण्ड पर नकारात्मक रिटर्न देती है। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी होता है कि निवेशक निवेश की तारीख से 5 साल के बाद भी बॉन्ड को रिडीम कर सकते हैं।

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