नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्न बैंक (आरबीआई) ने आज अपनी मौद्रिक नीति रिपोर्ट जारी की है। अपनी रिपोर्ट ने चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति के 2.4 फीसदी तक गिरने का अनुमान लगाया है। हालांकि आरबीआई के मुताबिक मुद्रास्फीति में यह गिरावट मजबूरी में आएगी। मगर सब्जियों की मांग और कीमतों में भारी गिरावट के बीच इससे ब्याज दरों में पर्याप्त कटौती के लिए काफी गुंजाइश होगी। मगर आरबीआई ने रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए कहा है कि कोरोनावायरस भविष्य पर एक काले साये की तरह मंडरा रहा है, जो सारे गणित को बिगाड़ सकता है। आरबीआई ने वित्तीय वर्ष के लिए अपनी मौद्रिक नीति रिपोर्ट में कहा कि कोरोनावायरस के दूसरे दौर का प्रभाव और अधिक 'गंभीर' हो सकते है। भारतीय बाजार में अस्थिरता के कारण इससे निवेशकों और उपभोक्ताओं का आत्मविश्वास टूट जाएगा।
इमरजेंसी में हुई मौद्रिक नीति बैठक
यह रिपोर्ट आमतौर पर मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की ब्याज दर के फैसले के साथ ही जारी की जाती है। लेकिन इसे इस बार स्थगित कर दिया गया था क्योंकि एमपीसी की बैठक 27 मार्च को समय से पहले कर ली गई थी। उसका मकसद वित्तीय बाजारों में कोरोना से निपटने के लिए आपातकालीन उपाय करना था। 27 मार्च को हुई आरबीआई ने एमपीसी बैठक के समापन पर कई बड़ी घोषणाएं की थीं। इनमें कोरोना से आर्थिक तौर पर प्रभावित लोगों के लिए बहुत कुछ था। आरबीआई के मुताबिक इन परिस्थितियों में पूर्वानुमान लगाना खतरनाक हैं क्योंकि महामारी के कारण आने वाले हर डेटा के साथ उनमें बड़ा बदलाव हो सकता है।
नहीं लगाया था अनुमान
आरबीआई ने 27 मार्च की नीतिगत बैठक के दौरान किसी तरह का अनुमान नहीं जारी किया था। मगर अब आरबीआई ने जनवरी-मार्च तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की मुद्रास्फीति 2.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, जबकि इसने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 4.8 फीसदी का अनुमान लगाया था। बता दें कि एमपीसी का लक्ष्य सीपीआई को 4 प्रतिशत के अंदर रखना है। इसके दोनों तरफ 2 फीसदी का पॉइंट बैंड है। आरबीआई विकास दर के लिए कोई अनुमान नहीं लगाया है, मगर कई एजेंसियां भारत की अनुमानित विकास दर में भारी कटौती कर चुकी हैं।
वैश्विक आर्थिक मंदी के संकेत
केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ेगी, जैसा कि कोविड-19 अनुमानों से पता चलता है। मगर अगर कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में भारी कमी बरकरार रहती है ते भारत की व्यापार स्थिति में सुधार हो सकता है। मगर साथ ही आरबीआई ने यह भी कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों से होने वाला लाभ लॉकडाउन और बाहरी मांग के घटने से होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएगा। केंद्रीय बैंक ने ये भी कहा कि लॉकडाउन के कारण मचे हाहाकार को देखते हुए मुद्रास्फीति को मापने के लिए डेटा एकत्र करना तक भी मुश्किल होगा।
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