RBI completes sale of 50 year bonds: भारत की पहली 50-वर्षीय बांड की नीलामी शुक्रवार को मजबूत मांग के साथ पूरा हो गई। इसकी मांग अल्ट्रा-लॉन्ग पेपर्स के लिए बीमा और पेंशन फंडों की तरफ से आई है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक बयान में कहा कि सरकार ने 2073 बांड के 10,000 करोड़ रुपये (1.2 बिलियन डॉलर) के बांड 7.46 प्रतिशत की कटऑफ यील्ड पर बेचे गए हैं। यह ब्लूमबर्ग सर्वेक्षण के 7.48 प्रतिशत पूर्वानुमान से कम है। बीमाकर्ताओं सहित निवेशकों ने संभवतः इन पेपर को हाथों-हाथ लिया है।

देश के बढ़ते जीवन बीमा और पेंशन फंड उद्योग का मुख्य कारण मध्यम वर्ग की तरफ से इस सेक्टर में भारी डिमांड है। इसके चलते बीमा उद्योग का आकार तेजी से बढ़ रहा है। इस सेक्टर में अनुमान है कि 1 ट्रिलियन डॉलर के बांड की मांग है।
सॉवरेन ग्लोबल मार्केट्स के प्रबंध निदेशक उमेश तुलस्यान के अनुसार लंबी अवधि के पेपर जारी करना एक बहुत ही विशिष्ट मांग थी, जो लंबे समय से आरबीआई से की जा रही थी। अगर प्रतिक्रिया अच्छी रही, तो आरबीआई निश्चित रूप से अल्ट्रा-लॉन्ग सेगमेंट में पेपर पेश करना जारी रखेगा।
लंबी अवधि के बांड की बिक्री से सरकार को बेचे गए ऋण की अवधि बढ़ाने और अपनी ब्याज लागत को नियंत्रण में रखने में मदद मिल सकती है। आज की कटऑफ पिछले सप्ताह नीलाम हुए 40-वर्षीय पेपर की यील्ड 7.54 प्रतिशत कम रही।
वैसे सरकार की अक्टूबर से फरवरी की अवधि में 30,000 करोड़ रुपये के 50 साल के बांड बेचने की योजना भी है। सरकार चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही में लम्बी अवधि के बांड के माध्यम से अपनी पैसों की जरूरत का बड़ा भाग पूरा करेगा। यह बांड 30-50 वर्षों में परिपक्व होने वाले होंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने सितंबर में कहा था कि वह अल्ट्रा-लॉन्ग पेपर्स के लिए बाजार की मांग के जवाब में 50 वर्षीय बांड जारी करने की योजना बना रहा है।


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