नई दिल्ली। देश के ज्यादातर बैंक शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं। इनमें से ज्यादातर बैंक अपने निवेशकों को लगातार लाभांश का भुगतान कर रहे थे। यह डिविडेंड का भुगतान हर साल कई हजार करोड़ रुपये का होता है। लेकिन चालू वित्तीय वर्ष में बैंक डिविडेंड की घोषणा नहींं कर पाएंगे। आरबीआई ने आज जारी अपनी मौद्रिक नीति में इस बात का ऐलान किया है। हालांकि आरबीआई ने इसका कारण बैंकों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाए रखना है, लेकिन इस फैसले से निवेशकों को नुकसान होगा।
आज घोषित हुई है क्रेडिट पॉलिसी
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने आज ही मौद्रिक नीति की घोषणा की है। इसमें जहां रेपो रेट में बदलाव न करने की घोषणा है, वहीं बैंकों को लाभांश देने से रोक की घोषणा भी शामिल है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया है कि देश के सभी कमर्शियल और कोऑपरेटिव बैंकों वित्तीय वर्ष 21 के लिए लाभांश की घोषणा नहीं करेंगे। आरबीआई ने कहा है कि यह बैंक चालू वित्तीय वर्ष में कमाए लाभ को अपने पासा ही रखेंगे। आरबीआई के इस फैसले के बाद वित्तीय वर्ष 2021 में निवेशकों को बैंक लाभांश नहीं दें पाएंगे। आरबीआई के अनुसार यह फैसला बैंकों को वित्तीय रूप से मजबूती प्रदान करने के लिए लिया गया है। वहीं आरबीआई ने बड़े एनबीएफसी और कोऑपरेटिव बैंकों में रिस्क-बेस्ड ऑडिट की शुरुआत करने की बात भी कही है। इसके अलावा एनबीएफसी के लिए भी लाभांश वितरण के लिए एक अलग मानक बनाया जाएगा।
कॉन्टैक्टलेस कार्ड पेमेंट की लिमिट बढ़ाई
वहीं आरबीआई ने कॉन्टैक्टलेस कार्ड पेमेंट को लिमिट को भी 2000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया है। हालांकि यह फैसला आगाकमी 1 जनवरी 2021 से लागू होगा। इसके अलावा आरबीआई ने बताया है कि आरटीजीएस से पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा 24 घंटे मिलने लगी है।
क्रेडिट पॉलिसी की बड़ी बातें
-रेपो रेट 4 फीसदी बनी रहेगी
-रिवर्स रेपो रेट 3,35 फीसदी बनी रहेगी
-सीपीआई आधारित महंगाई तीसरी तिमाही में 6.8 फीसदी रहने का संभावना
-वित्तीय वर्ष 2021 में रियल जीडीपी -7.5 फीसदी रहने का अनुमान


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