नयी दिल्ली। आरबीआई के अनुसार सभी बैंकों का सकल एनपीए (जीएनपीए) अनुपात मार्च 2020 में 8.5 फीसदी से बढ़ कर मार्च 2021 तक 12.5 फीसदी पहुंच सकता है। इसका कारण कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए लॉकडाउन के नतीजे में सामने आई अर्थव्यवस्था में मंदी है। आरबीआई ने माना कि बैंकों द्वारा दी गई लोन ईएमआई पर 6 महीने की मोहलत से एनपीए में वृद्धि हो सकती है। ये देखते हुए कि इस मोहलत का प्रभाव अभी भी अनिश्चित और विस्तार कर रहा है, बैंकिंग एसेट क्वालिटी पर इसका प्रभाव कैसा होगा इसका सही-सही पता लगाना मुश्किल है। आरबीआई के अनुसार इस तथ्य का पता सिर्फ समय बीतने के साथ ही लगेगा।
जीडीपी में गिरावट का अनुमान
आरबीआई की तरफ से जारी की गई अपनी अर्ध-वार्षिक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा गया है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 4.4 फीसदी की गिरावट आ सकती है। वहीं सकल राजकोषीय घाटा 10.9 फीसदी और उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 4.1 फीसदी हो सकती है। वहीं अलग-अलग बैंक समूहों के बीच मार्च 2021 में सरकारी बैंकों का जीएनपीए अनुपात 15.2 फीसदी तक बढ़ जाएगा जो मार्च 2020 में 11.3 फीसदी। वहीं प्राइवेट बैंकों का जीएनपीए अनुपात 3.9 फीसदी से 7.3 फीसदी और और विदेशी बैंकों जीएनपीए 2.3 फीसदी से 4.2 फीसदी तक बढ़ सकता है।
कितना हो जाएगा एनपीए अनुपात
आरबीआई ने कहा है कि सबसे बुरी स्थिति में मार्च 2021 तक सरकारी बैंकों की एनपीए बढ़ कर 16.3 फीसदी, प्राइवेट सेक्टर के बैंकों का 8.7 फीसदी और विदेशी बैंकों का एनपीए 8.5 फीसदी तक पहुंच सकता है। आरबीआई के मुताबिक एनपीए में बढ़ोतरी से बैंकिंग पूंजी पर्याप्तता अनुपात में गिरावट आएगी। आरबीआई ने कहा सिस्टम लेवल का सीआरएआर मार्च 2020 में 14.6 फीसदी से घट कर मार्च 2021 में 13.3 फीसदी तक जा सकता है और बहुत गंभीर एनपीए बढ़ोतरी की स्थिति में ये 11.8 फीसदी घट सकती है।
सीईटी 1 पूंजी अनुपात में गिरावट संभव
आरबीआई के मुताबिक मुख्य पूंजी या सामान्य इक्विटी टीयर I (सीईटी 1) पूंजी अनुपात में भी गिरावट आ सकती है। सीईटी 1 मार्च 2020 में 11.7 फीसदी से मार्च 2021 तक 10.7 फीसदी घट सकता है। मगर यदि एनपीए के मामले में हालात बदतर हुए तो ये 9.4 फीसदी तक गिर सकता है। इसके अलावा इन हालातों के तहत तीन बैंक मार्च 2021 तक 5.5 फीसदी के न्यूनतम विनियामक सीईटी 1 पूंजी अनुपात को पूरा करने में विफल हो सकते हैं। वहीं 5 बैंक ऐसे भी हैं जो मार्च 2021 तक बेहद गंभीर दबाव में न्यूनतम पूंजी स्तर को पूरा करने में विफल हो सकते हैं। आरबीआई के अनुसार एनबीएफसी, विद्युत उत्पादन कंपनियां और पेट्रोलियम उत्पाद निर्माता कोरोना से बहुत अधिक प्रभावित हुए हैं।
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