भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा का ऐलान किया। जिसमें रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसे 4 फीसद पर बरकरार रखा गया है। इसके साथ ही, दूसरी प्रमुख ब्याज दरों को भी नहीं बदला गया है।
नई दिल्ली, फरवरी 10। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा का ऐलान किया। जिसमें रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसे 4 फीसद पर बरकरार रखा गया है। इसके साथ ही, दूसरी प्रमुख ब्याज दरों को भी नहीं बदला गया है। जानकारी के लिए बता दें कि एमपीसी बैठक में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में लगातार 10वीं बार कोई बदलाव नहीं किया गया।

ब्याज दरों में नहीं हुआ कोई बदलाव
रिजर्व बैंक के फैसले के बाद ब्याज दरें अब भी नीचे बनी रहेंगी, क्योंकि आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रेपो रेट को 4 फीसदी पर फिर स्थिर रखने का फैसला किया गया है। इसी तरह, रिवर्स रेपो रेट भी 3.35 फीसदी पर बना रहेगा। वहीं कई विशेषज्ञ और बाजार विश्लेषक रिवर्स रेपो रेट को बढ़ाने का अनुमान लगा रहे थे। हालांकि, सभी अनुमानों के उलट रिजर्व बैंक ने अपनी नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। जैसा कि आरबीआई ने रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया, ऐसे में रेपो-दर से जुड़े घर, ऑटो ऋण पर दरें जल्द ही बढ़ने की संभावना नहीं है। इसलिए इन कर्जदारों की लोन ईएमआई समान रहने की संभावना है।
जो लोग नए ऋण लेने की योजना बना रहे हैं, उन्हें जल्द से जल्द इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए क्योंकि कई बैंक ब्याज दरों और प्रसंस्करण शुल्क में छूट की पेशकश कर रहे हैं। होम लोन की ब्याज दरें अब 6.50 प्रतिशत से शुरू होती हैं जबकि कार लोन 7.20 प्रतिशत ब्याज से शुरू किया जा सकता है। नए कर्जदारों को मौजूदा कम दरों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि बढ़ती महंगाई आरबीआई को आगामी नीति समीक्षा बैठक में प्रमुख दरों पर अपना फैसला बदलने के लिए मजबूर कर सकती है।
छोटी जमा दरों में हो सकती तेजी
जब भी ब्याज दर कम होता है तो आमतौर पर छोटी से मध्यम अवधि की जमा बढ़ने की संभावना होती हैं। जहां तक लंबी अवधि की ब्याज दरों का सवाल है, इन दरों में उल्लेखनीय वृद्धि होने में थोड़ा अधिक समय लगेगा। जैसा कि आरबीआई ने रेपो दर को अपरिवर्तित रखा है, बैंकों द्वारा एफडी दरों में और कमी नहीं की जा सकती है। लेकिन कुछ बैंक मांग और आपूर्ति के आधार पर विशिष्ट अवधि के एफडी पर दरों में बदलाव कर सकते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि चूंकि एफडी दरें पहले से ही ऐतिहासिक निचले स्तर पर हैं, इसलिए एफडी दरों में और कमी नहीं हो सकती है, क्योंकि उच्च मुद्रास्फीति के बीच वास्तविक दरें नकारात्मक हो गई हैं।
इन दौरान शक्तिकांत दास ने कहा है कि फिलहाल खुदरा महंगाई से ज्यादा राहत मिलती नहीं दिख रही और 2022-23 की दूसरी छमाही यानी सितंबर 2022 के बाद ही इसमें नरमी के संकेत मिल रहे हैं। महंगाई पर घरेलू कारणों से ज्यादा ग्लोबल फैक्टर का दबाव है। दुनियाभर में महंगाई बढ़ रही है। ऐसे में सिर्फ भारत में इसके नीचे जाने की फिलहाल कोई संभावना नहीं दिख रही।
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