नई दिल्ली, जुलाई 13। भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में आयात-निर्यात के लिए भारतीय करेंसी 'रुपए' में भुगतान की अनुमति दी है। रिजर्व बैंक की इस कदम के बाद जानकारों का मानना है कि भारतीय रुपये में इंटरनेशनल ट्रेड की शुरुआत से हार्ड करेंसी में सालाना 30-36 बिलियन डॉलर की बचत हो सकती है। रुपए में पेमेंट की गुंजाइश के बाद देशों के बीच ट्रेड बढ़ जाएगा क्योंकि एक्सचेंज रेट पर दबाव कम होगा।
भारत के लिए अनुकूल
रुस-युक्रेन युद्ध के बाद बने स्थिति को देखते हुए रुपए में भुगतान को रूस के साथ बिना देरी के शुरू किया जा सकता है। अगर सरकार जल्द ही भुगतान रुपए में शुरू कर देती है तो यह भारत सरकार के बांडों के लिए भी अनुकूल हो सकता है। विदेशी भुगतान के लिए खोले गए विशेष वोस्ट्रो खातों की राशि का उपयोग स्थानीय पूंजी बाजार में भारत के व्यापारिक भागीदारों के सहयोग से निवेश किया जा सकता है। इकोनॉमिक टाइम्स के खबर के अनुसार जब कोई देश रिकॉर्ड उच्च चालू खाता घाटे का सामना करता है, तो चुनिंदा देशों के साथ इस तरह के रुपये में व्यापार से भारत की जमा पूंजी को असर कम पड़ेगा।"
मुद्रा बास्केट का विस्तार करने की जरूरत
अप्रैल और मई में रूस को भारत का आयात लगभग 2.5 अरब डॉलर का था अगर हम सालाना आधार पर इसे देखे तो यह 30 अरब डॉलर होगा। कुछ जानकारों का अनुमान है कि वित्त वर्ष के दौरान यह बढ़कर मासिक औसत 3 अरब डॉलर या कुल मिलाकर 36 अरब डॉलर सालाना का हो जाएगा। रिजर्व बैंक का यह कदम संभावित रूप से भारत की मुद्रा निकासी को अब 3 बिलियन डॉलर प्रति माह की सीमा तक कम कर सकता है। इस कदम के बाद रूस भारत में रुपया व्यापार के लिए रुपए का कोष जमा करेगा जो भारतीय अर्थव्यवस्था के नजरिए से सकारात्मक कदम है।
डॉलर विश्व का शीर्ष रिजर्व है
दुनिया के अधिकांश विदेशी मुद्रा भंडार डॉलर, यूरो, रॅन्मिन्बी और पाउंड के रूप में रखे गए हैं। डॉलर दुनिया की शीर्ष रिजर्व मुद्रा बना हुआ है लेकिन इसका प्रभाव पिछले पांच सालों में कुछ हद तक कम हो गया है। आईएमएफ के आंकड़ों के अनुसार 2022 कैलेंडर वर्ष की पहली तिमाही के में डॉलर में फॉरेन रिजर्व रखने के आंकड़ों में कमी आई है। इस कमी के बावजूद डॉलर अभी भी विश्व विदेशी रिजर्व में 60 प्रतिशत की भागीदारी रखता है। भारत का व्यापार घाटा, या निर्यात से अधिक आयात, जून में बढ़कर रिकॉर्ड 25.63 बिलियन डॉलर हो गया है।
भारत रुस दोनो को होगा फायदा
रुस और भारतीय बैंकिंग सिस्टम के लिए फायदेमंद
अगर जल्द ही भारत और रूस रुपए में भुगतान को शुरू कर देते हैं तो यह रुस और भारतीय बैंकिंग सिस्टम के लिए फायदेमंद होगा। दोनों देशों में भारतीय रुपए के भंडार को बढ़ाने के लिए बैंकों के बीच करार होगा, जो रूस और भारत के व्यापार और बैंकिंग सिस्टम में एक नया सकारात्मक बदलाव होगा।
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