नयी दिल्ली। देश लॉकडाउन के चौथे दौर में पहुंच गया है। इस हफ्ते की शुरुआत में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने 31 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान किया था। इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को एक बार बैंकिंग लेनदेन के लिए डिजिटल मोड का उपयोग करने की बात दोहराई। कोरोनोवायरस को फैलने से रोकने और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए लॉकडाउन में डिजिटल भुगतान मोड का इस्तेमाल अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। दरअसल लॉकडाउन से लोगों के घरों से निकलने पर पाबंदी लगी है। ऐसे में घर पर सुरक्षित रह कर बैंकिंग के लिए डिजिटल मोड बेस्ट ऑप्शन है।

आरबीआई ने शुरू किया अभियान
आरबीआई ने एक अभियान शुरू किया है। माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर शुरू किए गए अभियान में आरबीआई ने कहा कि डिजिटल भुगतान मोड लोगों के लिए घर पर सुरक्षित रहते हुए बैंकिंग लेनदेन करना आसान बनाता है। आरबीआई के अभियान में घर के अंदर से सुरक्षित डिजिटल लेनदेन करने पर जोर दिया गया है। अगर आप डिजिटल बैंकिंग करना चाहते हैं तो आपके सामने कई डिजिटल भुगतान विकल्प मौजूद हैं जिनमें एनईएफटी, आईएमपीएस (Immediate Payment Service) और यूपीआई शामिल हैं जो चौबीसों घंटे उपलब्ध हैं।
सोशल डिस्टेंसिंग को बढ़ावा
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने जनता से सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए डिजिटल बैंकिंग सहित हर एहतियाती उपाय का उपयोग करने की अपील की थी। आरबीआई ने लेनदेन के डिजिटल तरीकों का उपयोग करते हुए ग्राहकों को किसी भी धोखाधड़ी से बचने के लिए सतर्क रहने की चेतावनी भी दी थी। बता दें कि कोरोनावायरस फैलने की शुरुआत से ही सरकार और बैंक कैश के बजाय डिजिटल पेमेंट के जरिये लेन-देन का सुझाव देते रहे हैं।
आरटीजीसी और एनईएफटी में गिरावट
हालांकि लॉकडाउन के कारण मार्च की तुलना में अप्रैल में रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) और एनईएफटी में क्रमश: 54.31% और 32.92% की गिरावट आई है। आरटीजीएस और एनईएफटी के जरिए लेनदेन मूल्य में भी 46.51% और 42.79% तक की कमी दर्ज की गई है। अप्रैल में 64.43 लाख करोड़ रुपये की 54.34 आरटीजीसी लेन-देन हुईं, जबकि एनईएफटी के 17.59 करोड़ लेन-देन से 13.06 लाख करोड़ रुपये की ट्रांजेक्शन हुई।


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