Ratan Tata Will: कौन हैं मोहिनी मोहन दत्ता? रतन टाटा की वसीयत में मिले ₹588 करोड़, जानें क्या था रिश्ता

Ratan Tata Will: 9 अक्टूबर 2024 को रतन टाटा का निधन हो गया था। हाल ही में उनकी वसीयत से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। ताज होटल्स ग्रुप के पूर्व डायरेक्टर मोहिनी मोहन दत्ता ने अब दिवंगत उद्योगपति (संभावित सिमी टाटा) की वसीयत की शर्तें मान ली हैं। इस वसीयत में उन्हें करीब 588 करोड़ रुपये की संपत्ति(रेसिडुएल एस्टेट) का एक-तिहाई हिस्सा मिला है।

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रतन टाटा की 3,900 करोड़ रुपये की संपत्ति

दत्ता की सहमति के बाद वसीयत को कानूनी मान्यता (प्रोबेट) दिलवाने की प्रक्रिया बॉम्बे हाई कोर्ट में तेजी से आगे बढ़ सकेगी। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रतन टाटा ने करीब 3,900 करोड़ रुपये की संपत्ति दो दर्जन लोगों के बीच बांटी है। इन सभी में सिर्फ 77 वर्षीय दत्ता ने पहले विरासत की वैल्यू को लेकर सवाल उठाए थे। अब उन्हें इस संपत्ति में से करीब 200 करोड़ रुपये मिलेंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रतन टाटा का रेसिडुएल एस्टेट का बाकी दो-तिहाई हिस्सा शेयरों और अचल संपत्तियों को छोड़कर उनकी सौतेली बहनों, 72 वर्षीय शिरीन जेजेभोय और 70 वर्षीय डीना जेजेभोय को मिलेगा। ये दोनों बहनें वसीयत की एग्जीक्यूटर्स (क्रियान्वयनकर्ता) भी हैं।

हालांकि, मोहिनी मोहन दत्ता शुरू में इन एग्जीक्यूटर्स से असहमत थे, लेकिन वसीयत में शामिल "नो-कॉन्टेस्ट क्लॉज" के कारण वह इसे अदालत में चुनौती नहीं दे सके। इस क्लॉज के मुताबिक, अगर कोई लाभार्थी वसीयत को चुनौती देता है, तो वह अपने सभी अधिकार खो देता है।

मोहिनी मोहन दत्ता और रतन टाटा का रिश्ता

मोहिनी मोहन दत्ता और रतन टाटा के बीच का रिश्ता छह दशकों से भी ज्यादा पुराना था। मोहिनी मोहन दत्ता के मुताबिक, उनकी पहली मुलाकात जमशेदपुर के डीलर्स हॉस्टल में हुई थी। तब मोहिनी मोहन दत्ता 13 साल के थे और रतन टाटा 25 साल के। बाद में दत्ता मुंबई शिफ्ट हो गए और कोलाबा स्थित टाटा के बख्तावर निवास में रहने लगे। दत्ता ने स्वीकार किया कि टाटा ने ही उन्हें जिंदगी में ऊंचाई तक पहुंचने का मौका दिया, और उनके करियर को आकार देने में अहम भूमिका निभाई थी।

मोहिनी मोहन दत्ता का करियर

मोहिनी मोहन दत्ता ने अपने करियर की शुरुआत ताज होटल के ट्रैवल डेस्क से की थी। इसके बाद, उन्होंने 1986 में टाटा इंडस्ट्रीज से फंडिंग प्राप्त कर एक नई कंपनी स्टैलियन ट्रैवल सर्विसेज की स्थापना की। इस कंपनी के बाद साल 2006 में, स्टैलियन ट्रैवल सर्विसेज को ताज ग्रुप की एक सहायक कंपनी में मिला दिया गया। इस मर्जर के बाद, मोहिनी मोहन दत्ता को नई बनी यूनिट इंडिट्रैवल का निदेशक नियुक्त किया गया। वह ताज ग्रुप में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले अधिकारियों में से एक माने जाते थे।

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