Ratan Tata Death Anniversary: रतन टाटा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक अनमोल स्तम्भ हैं। वे सिर्फ एक सफल भारतीय उद्योगपति ही नहीं, बल्कि परोपकारी और टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं। उनके नेतृत्व और दूरदर्शिता ने देश के उद्योग जगत को नई दिशा दी।
रतन टाटा ने निवेश और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में भी अहम योगदान दिया, जिससे उन्होंने अनेक नए व्यापार को अवसर और समर्थन दिया। उनका जीवन और कार्य सभी के लिए सीखने और प्रेरित होने का स्रोत हैं।

बता दें कि 9 अक्टूबर, 2024 को 86 वर्ष की आयु में आयु संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनका निधन हो गया था। उनके अंतिम संस्कार पर कई राज्यों ने शोक दिवस की घोषणा की और मुंबई पुलिस ने औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया था, जबकि देश के लिए उनके योगदान के सम्मान में उनके पार्थिव शरीर को भारतीय ध्वज में लपेटा गया था। उन्होंने कभी शादी नहीं की और उनके कोई बच्चे नहीं थे। इस साल रतन टाटा के निधन का एक साल हो गया।
टाटा ग्रुप की ग्लोबल सफलता रतन टाटा के नेतृत्व में मिली नई दिशा
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सबसे बड़े और भरोसेमंद कॉरपोरेट समूहों में से एक टाटा ग्रुप ने अपने इतिहास में कई बड़े कदम उठाए हैं। विशेष रूप से रतन टाटा के नेतृत्व में ग्रुप ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई और उद्योग जगत में कई कीर्तिमान स्थापित किए। उनकी रणनीति में केवल भारत में विस्तार नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने पर भी ध्यान रहा।
टाटा स्टील और कोरस का ऐतिहासिक अधिग्रहण
साल 2007 में टाटा स्टील ने कोरस (Corus) नामक ब्रिटिश-डच स्टील कंपनी को 12 अरब डॉलर में खरीदा। यह उस समय भारत का सबसे बड़ा विदेशी अधिग्रहण माना गया। इस सौदे के बाद टाटा स्टील केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोपीय बाजार में भी अपनी मजबूत पकड़ बना ली। कोरस के अधिग्रहण से टाटा स्टील को नई तकनीक, प्रोडक्शन क्षमता और वैश्विक मान्यता मिली। इसके साथ ही कंपनी की मार्केट वैल्यू में भी महत्वपूर्ण इजाफा हुआ।
टाटा मोटर्स और जगुआर-लैंड रोवर का बेमिसाल कदम
साल 2008 में टाटा मोटर्स ने फोर्ड से जगुआर और लैंड रोवर को खरीदकर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में धमाकेदार कदम उठाया। शुरुआत में यह सौदा कई लोगों के लिए जोखिम भरा माना गया, लेकिन रतन टाटा के नेतृत्व में यह एक बड़ी सफलता साबित हुआ।
JLR ने जल्द ही फायदा देना शुरू किया और 2015 तक यह टाटा मोटर्स के कुल मुनाफे का 90% से ज्यादा योगदान देने लगा। इस कदम ने टाटा मोटर्स की स्थिति को वैश्विक ऑटो उद्योग में मजबूत किया।
TCS: ग्रुप की सबसे कीमती कंपनी
टाटा ग्रुप की मार्केट कैपिटलाइजेशन में सबसे बड़ा योगदान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का है। 1968 में स्थापित यह कंपनी रतन टाटा के निर्देशन में नई ऊंचाइयों पर पहुंची। 2004 में TCS ने आईपीओ के जरिए 4713 करोड़ रुपए जुटाए। आज TCS की मार्केट वैल्यू 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। TCS ने न केवल ग्रुप की आर्थिक शक्ति बढ़ाई बल्कि भारत को वैश्विक आईटी सर्विस बाजार में अग्रणी बनाने में भी मदद की।
नई दिशा में टाटा ग्रुप का विस्तार
रतन टाटा की सोच सिर्फ पुराने उद्योगों तक सीमित नहीं थी। उन्होंने ग्रुप को इलेक्ट्रिक वाहन (EV), नवीकरणीय ऊर्जा, रिटेल और ई-कॉमर्स में भी आगे बढ़ाया।
Tata Power में ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स, Tata Motors में इलेक्ट्रिक कार प्रोडक्शन और Trent, Tata Neu, BigBasket, 1mg जैसे नए ब्रांड्स ने उपभोक्ताओं की पहुंच बढ़ाई।
रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिर पहचान बनाई और यह साबित किया कि भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी मजबूत बन सकती हैं। आज टाटा ग्रुप सिर्फ बिजनेस नहीं बल्कि भारत की प्रगति और विश्वसनीयता का प्रतीक बन चुका है।
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