Ratan Tata News: टाटा ग्रुप के मानद अध्यक्ष और दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा अब इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। उनके साथ एक युवक जिसका नाम शंतनु नायडू अक्सर दिखता था लेकिन आखिर इन दोनों की मुलाकात कैसे हुई थी चलिए इसके बारे में आपको बताते हैं।

साल 2024 में रतन टाटा की पहली मुलाकात
नवभारत टाइम्स के अनुसार, शांतनु नायडू का जन्म 1993 में महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। शांतनु नायडू की रतन टाटा के साथ दोस्ती जानवरों के प्रति उनके प्रेम से शुरू हुई। दोनों की मुलाकात साल 2014 में हुई थी, जब नायडू ने आवारा कुत्तों को रात में कारों की टक्कर से बचाने के लिए रिफ्लेक्टिव कॉलर बनाए थे। उनकी इस पहल से प्रभावित होकर, टाटा संस के मानद चेयरमैन ने नायडू को उनके लिए काम करने के लिए आमंत्रित किया था।
रतन टाटा ने खुद शांतनु नायडू को फोन करके पूछा था कि मेरे असिस्टेंट बनोगे। इसके बाद वह साल 2022 में रतन टाटा के ऑफिस में जीएम बन गए। शांतनु नायडू मुंबई के रहने वाले हैं। शांतनु, रतन टाटा को स्टार्टअप्स में निवेश के लिए बिजनेस टिप्स भी देते थे।
शांतनु नायडू ने इस जगह से पूरी की अपनी पढ़ाई
शांतनु नायडू ने 2014 में सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की, बाद में कॉर्नेल के जॉनसन ग्रेजुएट स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए की डिग्री हासिल की।
कॉर्नेल में उनके कार्यकाल में कई नेतृत्वकारी भूमिकाएं और मान्यताएं शामिल थीं, जिनमें हेममीटर उद्यमिता पुरस्कार और जॉनसन लीडरशिप केस प्रतियोगिता शामिल थी।
इस वजह से रतन टाटा से शांतनु नायडू ने लिया था लोन
रतन टाटा के कार्यकारी सहायक के रूप में, नायडू का रतन टाटा की वसीयत में किया गया है। रतन टाटा ने नायडू के स्टार्टअप, गुडफेलो में अपना स्वामित्व छोड़ा है, और नायडू द्वारा विदेश में अपनी शिक्षा के लिए इस्तेमाल किए गए पर्सनल लोन को भी माफ कर दिया।
टाटा और नायडू के बीच दोस्ती कुत्तों के प्रति उनके आपसी प्रेम के कारण शुरू हुई और यह तब और मजबूत हो गई जब पुणे के मूल निवासी नायडू, जो टाटा समूह की एक कंपनी में काम करते थे, अमेरिका में अपनी पढ़ाई के बाद टाटा के निजी कार्यालय में शामिल हो गए।
साल 2021 में नायडू ने गुडफेलो नामक एक स्टार्टअप शुरू किया, जो भारत में अकेले रहने वाले बुज़ुर्ग व्यक्तियों की सहायता के लिए बनाया गया है। गुडफेलो का उद्देश्य बुजुर्गों के जीवन को बेहतर बनाना है, उन्हें साथ देना और उनका समर्थन करना है, जिससे अक्सर बुज़ुर्गों को अकेलेपन का सामना करना पड़ता है।
इससे पहले 2018 से नायडू टाटा के प्रबंधक की भूमिका निभा रहे हैं और टाटा के मार्गदर्शन में विभिन्न पहलों का प्रबंधन कर रहे हैं। उनका रिश्ता परोपकार और नवाचार के प्रति साझा प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
अपने प्रबंधकीय कर्तव्यों के अलावा, नायडू 2021 में हार्पर कॉलिन्स द्वारा प्रकाशित आई केम अपॉन ए लाइटहाउस के लेखक हैं। उनका करियर और परोपकारी कार्य युवा उद्यमियों को प्रेरित करते हैं, जो टाटा की करुणा और नेतृत्व की विरासत को आगे बढ़ाते हैं।
रतन टाटा की वसीहत में शांतनु का नाम
रतन टाटा के वसीहत में शांतनु नायडु का भी नाम है। उन्होंने नायडू के वेंचर गुडफेलोज (Goodfellows) में अपनी हिस्सेदारी छोड़ दी है, साथ ही विदेश में शांतनु नायडू के शैक्षिक खर्चों को भी भरा है।
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