नयी दिल्ली। जून में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफ़ेस (यूपीआई), कार्ड और मोबाइल वॉलेट के जरिए डिजिटल लेन-देन में काफी जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। बता दें कि कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए लॉकडाउन के कारण डिजिटल लेन-देन की वॉल्यूम में अप्रैल में 60 फीसदी की गिरावट आई थी। आरबीआई के डेटा के अनुसार नेशनल पेमेंट्स कॉर्प ऑफ़ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा संचालित यूपीआई ने 28 जून तक 2.41 लाख करोड़ रुपये की 1.23 अरब लेनदेन की प्रोसेस की है। यूपीआई द्वारा ये किसी महीने में रिकॉर्ड की गई सबसे अधिक वैल्यू है। अप्रैल में 99 करोड़ लेन-देन हुई थीं, जिनका कुल मूल्य 1.5 करोड़ रुपये है। अप्रैल में मासिक पर यूपीआई लेन-देन में अब तक सबसे बड़ी गिरावट आई थी।
क्यों बढ़ी डिजिटल लेन-देन
एक्सपर्ट कहते हैं कि यूपीआई लेन-देन बढ़ने की पीछे बड़ा कारण लोगों द्वारा कॉन्टैक्टलेस मॉड के जरिए अपने शॉपिंग आदि के बिल चुकाना है। कोरोनावायरस के कारण लोग ज्यादा डिजिटल ट्रांजेक्शन कर रहे हैं। अप्रैल के बाद डिजिटल लेन-देन में 'V' आकार की रिकवरी देखी गई है। यानी अप्रैल में इसमें भारी गिरावट आई और फिर तेजी से बढ़ोतरी भी दर्ज की गई। गूगल पे, जो भारत में प्रमुख यूपीआई प्लेटफॉर्म, ने शुरुआती लॉकडाउन के बाद आए महीनों में अपने प्लेटफॉर्म पर बिल भुगतान और ऑनलाइन रिचार्ज में 180 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है।
फोनपे ने भी रिकवरी
वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली पेमेंट कंपनी PhonePe ने भी कहा कि उसके वॉल्यूम में बढ़ोतरी हुई है। फोनपे के जरिए होने वाले लेन-देन जून में लॉकडाउन से पहले के स्तरों पर वापस आ गए हैं। इससे अलग कार्ड-आधारित लेनदेन में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। टॉप बैंकों के कार्ड्स से होने वाली लेन-देन कोरोना से पहले के स्तरों पर पहुंच गई है। एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा, आरबीएल बैंक और एसबीआई कार्ड्स ने कहा कि कार्ड आधारित लेन-देन कोरोना से पहले के लगभग 70-80 फीसदी पर आ गई है। मई के मुकाबले जून में डेबिट कार्ड के जरिए होने वाली लेन-देन में काफी बढ़ोतरी हुई है।
फुल रिकवरी में थोड़ा समय लगेगा
जानकारों का मानना है कि ये आंकड़े बताते हैं कि कंज्यूमर सेंटिमेंट में सुधार हो रहा है, हालांकि इसमें पूरी तरह से रिकवरी में थोड़ा समय लगेगा। बता दें कि मार्च में कोरोनावायरस के भारत में दाखिल होने के साथ ही बैंकों, आरबीआई और सरकार ने कैश के बजाय डिजिटल लेन-देन की ही सलाह दी थी। मगर अप्रैल में इसमें गिरावट इसलिए आई क्योंकि लोग खर्च कम कर रहे थे। दुकानें बंद होने, एयर टिकट रद्द, खाने-पीने पर लोगों के खर्च में कमी और बंद हो रहे फिल्म थियेटरों के कारण लोगों के खर्च में ही कमी आ रही थी। इन सभी के चलते लेन-देन में भी गिरावट आई थी, जिसमें अब सुधार हो रहा है।
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