नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर पांच दिवसीय ग्लोबल वर्चुअल समिट का उद्घाटन किया। रेस्पॉन्सिबल एआई फॉर सोशल एम्पावरमेंट या रेज (RAISE) 2020 नाम के इस समिट को सरकार इंडस्ट्री और एकेडेमिया के साथ मिल कर आयोजित कर रही है। इस समिट में स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि क्षेत्रों के ट्रांसफॉर्मेशन पर ध्यान दिया जाएगा। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि भारत के पास सबसे बड़ा आईडी सिस्टम यूनीक आईडेंटिटी सिस्टम आधार और इनोवेटिव डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई है। उन्होंने आईए पर खुल कर बात करने को बढ़िया कदम बताया। पीएम मोदी ने कहा कि तकनीक ने हमारे काम करने की जगह को ही बदल दिया है। पीएम के अनुसार आईए इंसान की बुद्धिजीविता के लिए पुरस्कार है। इससे टूल और टेक्नॉलिजी बनाने में मदद मिलती है। पीएम ने कहा कि काफी भारतीय इस सेक्टर में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में और भी लोग इस सेक्टर में काम करेंगे।

कार्यक्रम में कौन-कौन रहा शामिल
इस कार्यक्रम में पीएम मोदी के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद, नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी और आईबीएम के सीआई अरविंद कृष्ण शामिल रहे। जून में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, न्यूजीलैंड और अन्य कुछ देशों ने मिलकर एमआई के डेवलपमेंट और उपयोग के लिए ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जीपीएआई) बनाया था।
मुकेश अंबानी ने क्या कहा
इस कार्यक्रम में रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि भारत का युवा, इंडस्ट्री और पूरा देश उस एजेंडे के लिए तैयार है जिससे आईए को बढ़ावा मिलेगा। उनके अनुसार यह सही समय है और सभी साधन भी तैयार हैं जब भारत आईए सेक्टर में वर्ल्ड लीडर की तरह काम करे। कार्यक्रम में मौजूद आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत में लगभग 70 करोड़ लोगों के पास इंटरनेट है। उनके मुताबिक डिजिटल इंडिया के जरिए गवर्नेंस आसान हुई
क्या है इस कार्यक्रम का उद्देश्य
रेज 2020 को हेल्थ, एग्रीकल्चर, एजुकेशन और स्मार्ट मोबिलिटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में एआई को सामाजिक सशक्तिकरण, समावेश और परिवर्तन के लिए उपयोग करने के लिए विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में प्रमुख ऑपीनियन मेकर्स, शिक्षाविदों और सरकार के प्रतिनिधियों से वैश्विक भागीदारी के लिए आह्वान किया जाएगा।


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