Bank Merger 2.0: भारत में सरकारी बैंकों का ढांचा अगले कुछ सालों में पूरी तरह बदल सकता है। केंद्र सरकार पब्लिक सेक्टर बैंकों के बड़े मर्जर की योजना पर काम कर रही है। फिलहाल देश में 12 सरकारी बैंक हैं, लेकिन सरकार का टारगेट इनकी संख्या घटाकर सिर्फ 6-7 बड़े और मजबूत नेशनल बैंक बनाना है। मर्जर की आधिकारिक घोषणा अप्रैल-मई 2026 में होने की संभावना है।

कैसे और कब होगा मर्जर?
मनी9 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रक्रिया एकदम से नहीं होगी, बल्कि इसे 2-3 चरणों में पूरा किया जाएगा। शुरुआती चरण में सबसे पहले छोटे सरकारी बैंकों को एक दूसरे में मिलाया जा सकता है। उसके बाद उन्हें धीरे-धीरे SBI, PNB या बाकी बड़े बैंकों में मर्ज किया जाएगा। सरकार इस फैसले से पहले दिसंबर 2025 और मार्च 2026 की तिमाही रिपोर्ट का इंतजार करेगी ताकि हर बैंक की फाइनेंशियल स्थिति साफ हो सके।
मर्जर की शुरुआत FY27 में
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों की मानें तो योजना अभी फाइनल स्टेज में है।
घोषणा:अप्रैल-मई 2026
प्रक्रिया की शुरुआत: वित्त वर्ष 2026-27
पूरा होने में: कई वित्त वर्ष लग सकते हैं।
सरकार का मानना है कि चरणबद्ध मर्जर से बैंकिंग सिस्टम पर अचानक दबाव नहीं पड़ेगा और तकनीकी व कानूनी काम आसानी से पूरे हो जाएंगे।
पहले कौन से बैंक मर्ज हो सकते हैं?
शुरुआत इन बैंकों से हो सकती है:
बैंक ऑफ बड़ौदा
बैंक ऑफ इंडिया
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
इंडियन ओवरसीज बैंक
बैंक ऑफ महाराष्ट्र
यूको बैंक
पंजाब एंड सिंध बैंक
ये सभी बैंक साइज में SBI, PNB या यूनियन बैंक जैसे बड़े बैंकों से काफी छोटे हैं, इसलिए इन्हें मिलाना आसान माना जा रहा है।
पहले भी हुए हैं बड़े बैंक मर्जर
पिछले कई सालों में सरकार ने कई मेगा मर्जर किए हैं, वर्ष 2020 में 10 बैंकों का एक साथ विलय किया गया था। 2017 में SBI ने अपने 5 सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक को अपने साथ मिला लिया था। इन मर्जर्स के बाद बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई थी।
मर्जर की जरूरत क्यों पड़ी?
मर्जर के पीछे कई अहम कारण हैं:
पिछले तीन सालों में सरकारी बैंकों का मुनाफा तेजी से बढ़ा है। कई छोटे बैंकों में पब्लिक शेयरहोल्डिंग 25% से कम है, जो SEBI नियमों के खिलाफ है। एक जैसे कोर बैंकिंग सिस्टम (Finacle आदि) वाले बैंकों को मर्ज करना तकनीकी रूप से आसान है। सरकार ऐसे बड़े बैंक बनाना चाहती है जो वैश्विक स्तर पर मुकाबला कर सके। सरकार को विश्वास है कि कम संख्या में लेकिन बड़े और मजबूत बैंक देश की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग स्ट्रक्चर दोनों के लिए फायदेमंद होंगे।
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