SEBI Guidelines : IPO आवंटन में प्रो-रेटा सिस्टम से करप्ट हो रहा प्राइस डिस्कवरी सिस्टम

SEBI On IPO Allotment: सिक्योरिटी एंड अक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच ने कहा कि इनिशियल पब्लिक ऑफर यानी आईपीओ में शेयरों को प्रो-रेटा आधार पर आवंटित करने पर रोक लगा दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि यह प्राइस डिस्कवरी सिस्टम को करप्ट बना रहा था। बुच द्वारा यह बात ग्लोबल इकोनामिक पॉलिसी फोरम को संबोधित करते वक्त कही गई है। इस बीच एक कंपनी के अध्यक्ष द्वारा रिटेल इन्वेस्टर्स और हाई नेटवर्थ वाले इंडिविजुअल के लिए आईपीओ के आवंटन के रैंडम सिस्टम पर स्पष्टीकरण मांगा गया।

माधवी पुरी बुच के अनुसार यह सिस्टम, प्राइस-डिस्कवरी में मदद नहीं कर रहा था। उन्होंने कहा कि इस तरीके से आईपीओ कि गलत इमेज पेश हो रही है। इसके साथ ही आईपीओ की मांग को यह सिस्टम बढ़ा चढ़ा कर दिखा रहा है।

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कैसे होता है प्रो-रेटा सिस्टम से आईपीओ काआवंटन

प्रो-रेटा सिस्टम में आईपीओ आवंटित करने के लिए आनुपातिक रूप इस्तेमाल किया जाता है। इसका मतलब है कि आवेदन करने वाले हर व्यक्ति को आवंटन मिलता है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है, कि उन्हें उतनी ही मात्रा में आवंटन मिलेगा, जितना उन्होंने आवेदन किया है। अगर ओवरसब्सक्रिप्शन भी हो जाता है, तो भी सभी को उसे संख्या के रेश्यो में ही आवंटन मिलता है, जिसके लिए उन्होंने आवेदन किया है।

अगर आसान शब्दों में बताएं तो अगर कोई भी आईपीओ चार गुना ज्यादा सब्सक्राइब किया गया है तो, इसका मतलब है कि हर शेयर के लिए चार आवेदन है। इसके बाद शेयरों की संख्या और आवेदनों के रेश्यो के मुताबिक आईपीओ का आवंटन किया जाता है। ऐसे में इन्वेस्टर की ओर से दाखिल किए गए प्रत्येक चार आवेदनों के बदले एक शेयर आवंटित किया जाएगा।

बुच ने कहा कि इस सिस्टम के तहत आईपीओ में ओवर सब्सक्रिप्शन का स्तर बढ़ा चढ़ा कर बताया जा रहा था। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर प्रो-रेटा सिस्टम के हिसाब से किसी को शेयर चाहिए होता है, तो इन्वेस्टमेंट बैंकर अपने क्लाइंट को जरूर से भी ज्यादा शेयर खरीदने की सलाह देते हैं। आसान शब्दों में कहे तो अगर बैंकर को लगता है कि यह आईपीओ इश्यू 30 गुना तक अधिक सब्सक्राइब किया जाएगा और इन्वेस्टर को 200 शेयर चाहिए, तो बैंकर उसे 6000 के लिए आवेदन करने के लिए कहेगा। माधबी के अनुसार इस तरीके से प्राइस डिस्कवरी सिस्टम को करप्ट किया जा रहा है। क्योंकि इस सिस्टम के जरिए लग रहा था कि इन्वेस्टर 6000 शेयर चाहता था, लेकिन उसे जरूर सिर्फ 200 शेयर्स की थी।

बताते चलें की सेबी की चेयर पर्सन ने इस बात पर जोर दिया कि मार्केट रेगुलेटर द्वारा कभी भी आईपीओ प्राइस की डिस्कवरी पर फैसला नहीं लिया जाएगा। इसकी जगह बाजार में मांग और सप्लाई के आधार पर कीमत तय की जाएगी।

जानें क्या होता है आईपीओ

आईपीओ का मतलब इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग होता है। जब कोई भी कंपनी पहली बार पब्लिक को अपने शेयर ऑफर करती है, तो इसे आईपीओ कहा जाता है। आमतौर पर आईपीओ लाकर कंपनीयां अपने लिए फंड इक्कठा करती हैं। इससे पहले कंपनी को शेयर मार्केट में लिस्ट हो जाती है। इसके बाद निवेशक उसके शेयर को खरीद सकते हैं और उसे बेच भी सकते हैं।

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