Pre IPO Investment Tips: कंपनी शेयर मार्केट में लिस्ट होकर आईपीओ की मदद से पैसे जुटाती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्री-आईपीओ (Pre IPO) क्या होता है और इससे आखिर कि तरह से निवेशकों को फायदा मिलता है। आइए इन सभी सवालों के जवाब आपको देते हैं।

क्या होता है प्री-आईपीओ? (What is Pre IPO)
कंपनी बाजार में लिस्ट होने से पहले पैसे जुटाना चाहती है और इसके लिए कंपनी प्री-आईपीओ फंडिंग राउंड की मदद लेती है। प्री-आईपीओ के जरिए कंपनी को पैसे जुटाने के साथ-साथ उसे वैल्यूएशन में भी मदद मिलती है।
इसके अलावा इस फंडिंग राउंड में IPO से पहले ही पैसा जुटाया जाता है। जिससे आईपीओ को बेहतर रेस्पॉन्स मिलने की उम्मीद होती है।
प्री-आईपीओ में लागू होत है लॉक इन पीरियड (Pre IPO Kya Hai)
प्री-आईपीओ फंडिंग राउंड में पैसे लगाने वाले निवेशकों पर कुछ दिन का लॉक-इन पीरियड भी लागू होता है। अगर आप कंपनी के प्रमोटर्स में से कोई हैं तो आमतौर पर ये लॉक-इन पीरियड 18 महीनों का होगा, जबकि नॉन-प्रमोटर्स के लिए यह लॉक-इन पीरियड 6 महीनों का होता है। यह लॉक-इन पीरियड कंपनी अलग-अलग भी निर्धारित करती है।
कैसे कर सकते हैं इसमें निवेश?
अगर आप प्री-आईपीओ में पैसे लगाने के लिए आपको जरूरत ब्रोकर की जरूरत होती है। आपके और कपंनी के बीच में ब्रोकर एक ब्रिज की तरह काम करता है। आप ब्रोकर को पैसे देंगे, वह कंपनी को पैसे ट्रांसफर करेगा, कंपनी से शेयर आपके डीमेट खाते में आ जाएंगे।
ब्रोकर की मदद लेने के लिए आपको उसे कुछ ब्रोकरेज फीस चुकानी होगी और कौन सी कंपनी प्री-आईपीओ ला रही है इसके बारे में भी आपको पूरी जानकारी होनी जरूरी है।
वहीं, आईपीओ में पैसा लगाना चाहते हैं तो आपके पास एक बैंक खाता होना चाहिए और साथ ही एक डीमैट अकाउंट होना चाहिए।
अगर आप प्री-आईपीओ में पैसे लगाते हैं तो आपको अपने निवेश पर अच्छा रिटर्न मिल सकता है और प्री-आईपीओ राउंड में आईपीओ की तुलना में सस्ती कीमत पर आपको शेयर भी मिल सकता है।


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