नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने करोड़ों किसानों को 12-12 हजार रु की रकम दी है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब तक 3.71 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 12-12 हजार रुपये की राशि जमा की गई है। ये ऐसे किसान हैं जिन्हें योजना का लाभ शुरुआत से मिल रहा है। वरना इस योजना के कुल लाभार्थियों की संख्या 11 करोड़ से अधिक है। योजना के तहत अब तक 93 हजार करोड़ रुपये की राशि बांटी गई है। आइए जानते हैं कि इस योजना के बारे में विस्तार से।
इस राज्य के किसानों को नहीं मिला फायदा
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने राजनीतिक कारणों से अब तक इस योजना को लागू नहीं किया है, जिसके कारण वहां के एक भी किसान को इस योजना का लाभ नहीं मिला है। राज्य सरकार के प्रतिबंध के बावजूद पश्चिम बंगाल के 12 लाख किसानों ने इस योजना के तहत आवेदन किया है, लेकिन मोदी सरकार चाहकर भी उन्हें पैसा नहीं भेज पा रही है। बाकी सभी राज्यों ने इस योजना के तहत अपने किसानों को पैसा उपलब्ध कराने की कोशिश की है।
क्या है ये योजना और क्यों शुरू हुई
कृषि विशेषज्ञों की राय थी कि किसानों को डायरेक्ट आर्थिक मदद से उनकी स्थिति में सुधार हो सकता है। दिसंबर 2018 में मोदी सरकार ने इस दिशा में एक कदम उठाया और सभी किसानों को 6000-6000 रुपये सालाना देना शुरू किया। इस योजना का लाभ भाजपा और कांग्रेस दोनों शासित राज्यों के किसान ले रहे हैं। सरकार पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत हर साल 2000-2000 रु की तीन किस्तें किसानों के खाते में भेजती है।
इन राज्यों को किसानों को सबसे ज्यादा लाभ
जिन राज्यों के सबसे अधिक किसान इस योजना का लाभ ले रहे हैं उनमें पहले नंबर पर यूपी है जहां 1,11,60,403 किसानों को फायदा मिल रहा है। इसके बाद लिस्ट में क्रमवार तरीके से महाराष्ट्र (35,59,087 किसान), आंध्र प्रदेश (31,15,471 किसान), गुजरात (29,02,483 किसान), तमिलनाडु (25,94,512 किसान), राजस्थान (24,77,975 किसान), तेलंगाना (24,22,519 किसान), केरल (23,65,414 किसान), पंजाब (11,88,202 किसान) और हरियाणा (10,66,730 किसान) शामिल हैं।
कौन देता है पैसा
इस योजना के लिए 100 प्रतिशत पैसा केंद्र सरकार देती है। लेकिन कृषि राज्य सरकार का एक विषय होती है, इस वजह से यह लाभ तब तक प्राप्त नहीं होगा जब तक कि राज्य सरकार अपने किसानों के रिकॉर्ड की पुष्टि नहीं करती है। जब किसान इस योजना के तहत आवेदन करता है, तो उसे राजस्व रिकॉर्ड, आधार नंबर और बैंक खाता नंबर देनी होती है। राज्य सरकार इस डेटा की पुष्टि करती है।
राज्य सरकार की भूमिका अहम
जितने किसानों का डेटा वेरिफाई हो जाता है राज्य सरकार उनके फंड ट्रांसफर के आवेदन को जनरेट करती है और इसे केंद्र सरकार को भेजती है। इस आवेदन के आधार पर केंद्र सरकार राज्य सरकार के बैंक खाते में उतना पैसा भेजती है। फिर ये पैसा राज्य सरकार के खाते के माध्यम से किसानों तक पहुंचता है। पश्चिम बंगाल सरकार ने अभी तक एक भी किसान के डेटा को वेरिफाई नहीं किया है और न इसे सरकार को भेजा है। इसलिए तकनीकी रूप से मामला अटका हुआ है और किसानों के आवेदन के बाद भी पैसा नहीं भेजा जा रहा है।
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