Post Office MIS 2024: मेहनत की कमाई दिन दोगुना और रात चौगुना बढ़े तो मजा ही आ जाए. इसके लिए जरूरी है कि रकम का निवेश सही किया जाए. निवेश पर मिलने वाला रिटर्न जोखिम क्षमता पर भी निर्भर करता है. तो ऐसे में निवेशकों की पहली पसंद सरकारी सेविंग स्कीम होती है, जहां सुरक्षा के साथ गारंटीड रिटर्न भी मिलता है. पोस्ट ऑफिस की सेविंग स्कीम (Post Office Saving Schemes) इनमें से एक है. आज हम पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम के बारे में जानेंगे, जिसमें ब्याज से हर महीने इनकम होती है. सेविंग स्कीम (Saving Scheme) में निवेश की रकम पर मिलने वाले गारंटीड रिटर्न का आंकड़ा ज्यादातर बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट्स यानी FDs से भी ज्यादा होती है. इसमें POMIS भी शामिल हैं, तो चलिए कैलकुलेशन से समझते हैं...
हर महीने होगी पक्की इनकम
पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम में निवेशक को हर महीने गारंटीड रिटर्न मिलता है. उदाहरण से समझते हैं कि निवेशक ने 9 लाख रुपए का एकमुश्त जमा किया. स्कीम पर मौजूदा ब्याज दर 7.4 फीसदी सालाना है. जैसा की हम जानते हैं इस स्कीम में निवेश की मैच्योरिटी 5 साल की है. तो इस लिहाज से हर महीने ब्याज से कमाई का आंकड़ा 5550 रुपए होगी. यानी मैच्योरिटी पर ब्याज से कुल कमाई 3.33 लाख रुपए की होगी.

Post Office MIS 2024 Calculation
- एकमुश्त निवेश: 9 लाख रुपए
- निवेश पर सालाना ब्याज दर: 7.4%
- निवेश अवधि: 5 साल
- ब्याज से कमाई: 3,33,000 रुपए
- हर महीने ब्याज से कमाई: 5,550 रुपए
Post Office MIS से जुड़ी जरूरी बातें
Post Office की मंथली इनकम स्कीम के सिंगल अकाउंट में अधिकतम 9 लाख और ज्वॉइंट अकाउंट में अधिकतम 15 लाख रुपए तक जमा किया जा सकता है. निवेशक चाहें तो कुल प्रिंसिपल अमाउंट 5 साल की मेच्योरिटी पीरियड के बाद वापस मिल जाएगा. अगर निवेश की रकम को 5-5 साल और बढ़ा सकते हैं. इसके तहत हर 5 साल बाद निवेशकों के पास ऑप्शन होगा कि वे प्रिंसिपल अमाउंट को निकाल लें.
स्कीम की रकम मिलने वाले ब्याज की कमाई का भुगतान डाक घर के सेविंग अकाउंट के जरिए हर महीने किया जाता है. खास बात ये है कि पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम में निवेश पर TDS नहीं कटता. लेकिन ख्याल रहे कि जो इनकम ब्याज के जरिए आपके हाथ में आता है उसपर टैक्स लगता है.
Post Office MIS: प्री-मैच्योर क्लोजर का क्या है नियम?
निवेशक Post Office की मंथली सेविंग स्कीम की रकम को अगर मैच्योरिटी से पहले निकालना चाहे तो ये सुविधा एक साल के बाद ही मिलती है. यानी निवेश के सालभर के भीतर निवेशित रकम को नहीं निकाला जा सकता है. इसके अलावा पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में अगर निवेशक 5 साल से पहले यानी प्री-मैच्योर क्लोजर चाहते हैं तो इस पर पेनाल्टी देनी पड़ती है. इसके तहत अगर निवेशक रकम 1 से 3 साल के बीच में निकालना चाहते हैं तो कुल डिपॉजिट अमाउंट पर 2% की पेनल्टी लगती है. अगर प्री-मैच्योर क्लोजर 3-5 साल के अंदर की जाए तो कुल डिपॉजिट पर 1% की पेनल्टी लगती है.
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