नई दिल्ली, जनवरी 24। भारत में 90 के दशक की शुरुआत में हुए आर्थिक उदारीकरण के बाद से एक ट्रेंड रहा, जिसके तहत सबसे गरीब 20 फीसदी भारतीय परिवारों की सालाना इनकम 1995 के बाद से लगातार बढ़ रही थी। मगर बीते 5 सालों में उसमें भारी गिरावट आई है। इन 20 फीसदी परिवारों की इनकम 2015-16 के स्तर से कोरोना काल के 2020-21 तक आते-आते 53 फीसदी कम हो गई। यानी 5 सालों में भारत के सबसे गरीब 20 फीसदी परिवारों की सालाना इनकम आधे से कम रह गयी। इन्हीं पांच सालों अवधि में सबसे अमीर 20 फीसदी की सालाना इनकम में 39 फीसदी की वृद्धि देखी गयी। ये ट्रेंड पिरामिड के सबसे निचले और टॉप पर मौजूद लोगों पर पड़े कोविड के आर्थिक प्रभाव को भी दर्शाता है।
सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा
मुंबई स्थित थिंक-टैंक, पीपुल्स रिसर्च ऑन इंडियाज कंज्यूमर इकोनॉमी (प्राइस) द्वारा आयोजित आईसीई360 सर्वे 2021 में ये चीजें निकल कर सामने आई हैं। ये सर्वे अप्रैल और अक्टूबर 2021 के बीच किया गया। इसके पहले दौर में 200,000 घरों और दूसरे दौर में 42,000 घरों को कवर किया गया। यह सर्वे 100 जिलों के 120 कस्बों और 800 गांवों तक में हुआ है।
शहरी गरीबों पर ज्यादा मार
कोरोना काल में 2020-21 की कम से कम दो तिमाहियों के दौरान आर्थिक गतिविधियां ठप रहीं। इसके नतीजे में 2020-21 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.3 फीसदी की गिरावट आई। सर्वे में पता चला है कि महामारी ने शहरी गरीबों को सबसे अधिक प्रभावित किया और उनकी घरेलू इनकम को खत्म कर दिया। इस सर्वे में इनकम के आधार पर देश की आबादी को पाँच श्रेणियों में रखा गया है।
मिडिल क्लास को भी लगा झटका
सर्वे के अनुसार सबसे गरीब 20 फीसदी की इनकम में 53 फीसदी की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। वहीं लोअर मिडिल क्लास को भी इसी अवधि में झटका लगा और उनकी इनकम में 32 फीसदी की गिरावट आई। मिडिल क्लास की इनकम में इस दौरान 9 फीसदी की गिरावट आई। वहीं अपर मिडिल क्लास और अमीर लोगों की इनकम में क्रमश 7 फीसदी और 39 फीसदी की वृद्धि देखी गयी।
2005-2016 का सुनहरा दौर
पिरामिड (आय के हिसाब से) में सबसे नीचे वाले लोगों के लिए यह संकट कितना विनाशकारी रहा है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2005 और 2016 के बीच की 11 सालो की अवधि में सबसे अमीर 20 फीसदी लोगों की घरेलू आय में 34 फीसदी की वृद्धि हुई थी, मगर इस दौरान सबसे गरीब 20 फीसदी लोगों की इनकम 183 फीसदी बढ़ी थी। इन परिवारों की इनकम सालाना 9.9 फीसदी की दर से बढ़ी थी।
इनकम में हिस्सेदारी
सर्वे से पता चलता है कि सबसे अमीर 20 फीसदी की 1995 में कुल घरेलू आय में 50.2 फीसदी हिस्सेदारी थी। वहीं 2021 में उनका हिस्सा बढ़ कर 56.3 फीसदी हो गया। दूसरी ओर सबसे गरीब 20 फीसदी की हिस्सेदारी 5.9 फीसदी से गिर कर 3.3 फीसदी रह गयी। सबसे गरीब 20 प्रतिशत में, शहरी लोगों को ग्रामीण लोगों की तुलना में ज्यादा नुकसान हुआ। क्योंकि कोविड की पहली लहर और लॉकडाउन ने शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगवा दी और बहुत से लोगों की नौकरी चली, जिससे उनकी इनकम घटी।
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