PMAY-G: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत केंद्र सरकार का टारगेट है कि शहरों के साथ ही गांवों में रहने वाली महिलाओं को भी मजबूत बनाना है। सरकार की इस योजने के दूसरे में चरण ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाले मकानों में महिलाओं को 100% मालिकाना हक देने का टारगेट रखा गया है।

हालांकि, एक नए सर्वे लाया जा रहा है जिसका नाम आवास-प्लस 2024 है, इसके माध्यम से लाभार्थियों को मकानों के लिए अपडेटेड जानकारी के बारे में बताना होगा। सरकार की ये पहल पंजीकृत घरों के लिए फायदा लेने वाले घरों की महिला सदस्यों के नाम से ही पंजीकरण किया जाए।
केंद्र सरकार की इजाजत मिलने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 2 करोड़ घरों के बनाने की मंजूरी मिलने के बाद अब इसके दूसरे चरण को शुरू करने की ज्यादातर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस योजना का लाभ लेने वाले लोगों की सूची बनाई जाएगी, वहीं इसके माध्यम से इस योजना में एनरोलमेंट की चाह रखने वाले लोगों को सेल्फ सर्वे की इजाजत दी जाएगी।
आवास के माध्यम से महिलाओं को मजबूत बनाना
PMAY-G के माध्यम से महिलाओं को मजबूत करने के लिए एक सलाह जारी की गई है। इसमें अनिवार्य किया गया है कि घर के मालिकाना जानकारी में महिलाओं का नाम शामिल किया जाए, या तो अकेले या पुरुष सदस्यों के साथ संयुक्त रूप से। अगर घर शुरू में किसी पुरुष के नाम पर एक्सेप्ट किया जाता है, तो महिला सदस्यों को इजाजत पत्रों में सेकन्डेरी मालिक के रूप में जोड़ा जा सकता है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय पीएमएवाई-जी के माध्यम से मार्च 2029 तक ग्रामीण क्षेत्रों में "सभी के लिए आवास" प्राप्त करने के लिए मजबूत है। 1 अप्रैल 2016 को शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य पात्र ग्रामीण परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से तैयार 4.95 करोड़ पक्के घर बनाने में सहायता प्रदान करना है।
प्रोग्रेस और टारगेट
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कुल 3.33 करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री के बयान के अनुसार, इनमें से 3.22 करोड़ मकानों को मंजूरी मिल चुकी है और अब तक 2.68 करोड़ से अधिक मकान बनकर तैयार हो चुके हैं।
पीएमएवाई-जी के तहत महिला लाभार्थियों को आजीविका और रोजगार के अवसरों के लिए स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जोड़ा जाता है। डीएवाई-एनआरएलएम योजना कारोबार को बढ़ावा देने समेत अलग अलग उद्देश्यों के लिए बैंक लोन की सुविधा देकर एसएचजी का समर्थन करती है।
महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों के लिए वित्तीय सहायता
अपनी शुरुआत से लेकर अब तक डीएवाई-एनआरएलएम मिशन ने पूरे भारत में 10.05 करोड़ ग्रामीण परिवारों को 90.87 लाख स्वयं सहायता समूहों के गठन में शामिल किया है। इन समूहों को अपनी पहलों को समर्थन देने के लिए सामूहिक रूप से 9.74 लाख करोड़ रुपये के बैंक लोन मिले हैं।
यह वित्तीय सहायता महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को अलग अलग बिजनेस शुरू करने तथा अपने समुदायों में अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में मजबूत बनाती है।
पीएमएवाई-जी और डीएवाई-एनआरएलएम के माध्यम से सरकार के प्रयास महिलाओं को आवास सुरक्षा और वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करके समाज में उनकी भूमिका को बढ़ाने की मजबूती को दिखती है।
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